बिलारी और कांठ स्थित सरकारी अस्पतालों में एक बार फिर एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) का संकट खड़ा हो गया है। पिछले चार दिनों से अस्पतालों में एआरवी नहीं है। कुत्ते के काटने पर लोगों को जिला अस्पताल मुरादाबाद रेफर किया जा रहा है। इससे जिला अस्पताल की ओपीडी में इंजेक्शन लगवाने वालों का दबाव बढ़ गया है।
मुरादाबाद जिले में आवारा और पागल कुत्तों का जबर्दस्त आतंक है। मुरादाबाद शहर, बिलारी और कांठ में कुत्तों के हमले की सबसे अधिक घटनाएं होती हैं। सीएमओ कार्यालय के अधीन जिला औषधि भंडार से जिले के नौ प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को एंटी रैबीज वैक्सीन की सप्लाई होती है। जिलों को खपत की तुलना में वैक्सीन की सप्लाई नहीं हो रही है। जिसके चलते मांग पूरी नहीं हो रही है। दिसंबर में कांठ और बिलारी अस्पतालों को 80-80 वॉयल एआरवी की सप्लाई हुई थी। महीने के आखिरी सप्ताह में एआरवी खत्म हो गई है। इससे कुत्ते के काटने पर लोगों को जिला अस्पताल मुरादाबाद रेफर करना शुरू कर दिया है।
कांठ और बिलारी से इंजेक्शन लगवाने के लिए लोग जिला अस्पताल की ओपीडी पहुंचे रहे हैं। ओपीडी के डाक्टर बलराज के मुताबिक आमतौर पर अस्पताल में रोजाना 60 लोग इंजेक्शन लगवाने आते थे। पिछले चार दिनों से लोगों की संख्या बढ़कर 80 तक पहुंचने लगी है। इनमें कांठ और बिलारी के लोग शामिल हैं। कांठ और बिलारी से लोगों को जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। बिलारी निवासी मो. शकील ने बताया कि इंजेक्शन लगवाने लगवाने मुरादाबाद आने के लिए पूरा दिन और पैसे बर्बाद करने पर पड़ रहे हैं।
निजी अस्पतालों में पहुंच रहे लोग
कांठ और बिलारी में एआरवी नहीं मिलने से कई लोग निजी अस्पताल पहुंच रहे हैं। मेडिकल स्टोर में एआरवी की एक डोज चार सौ रुपये से महंगी है। पांच इंजेक्शन का कोर्स करना पड़ता है। इससे मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
- कांठ और बिलारी में एआरवी की प्रतिमाह 150 वॉयल से अधिक मांग रहती है। सीमित कोटा होने से दोनों अस्पतालों को दिसंबर में 80-80 वॉयल दी गई थी। जनवरी के लिए रिजर्व में मात्र 600 वॉयल हैं। नौ अस्पतालों को इनकी सप्लाई होनी है। कारपोरेशन से दो हजार एआरवी वॉयल की मांग की गई थी। कारपोरेशन से मात्र 680 वॉयल की सप्लाई हुई है।
- एसपी सिंह, चीफ फार्मेसिस्ट