मुरादाबाद। प्रधानमंत्री की प्राथमिकता वाली आवास योजना को अफसर गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यही कारण है कि गरीबों के सिर पर छत पाने का सपना कबाड़ में पड़ा मिल रहा है। दलाल और डूडा के अधिकारियों की मिली भगत से लोगों को आशियाना नहीं मिल रहा है। सार्वजनिक रूप से कैंप लगाकर गरीबों से आवास के नाम पर वसूली के आरोप लगे हैं। इतना सब कुछ होने के बावजूद जिम्मेदार अफसर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
हर परिवार का सपना घर पाना होता है। इस सपने को पूरा करने के लिए मुरादाबाद के करीब 50 हजार लोगों ने आवेदन किए हैं। इनमें से अधिकांश ने कर्ज लेकर भी दलालों की मांग पूरी की है। इसके बावजूद डूडा में गरीबों को कोई जानकारी देने तक को तैयार नहीं है। आए दिन डूडा आफिस के बाहर आवास के लिए आवेदन करने वालों की भीड़ लगी रहती है। केवल इतना ही नहीं, जिनके ऊपर दलाली का आरोप है, वह अक्सर डूडा आफिस में देखे जाते हैं। दलालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए तीन लिखित में शिकायतें की गईं लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं हुई। हर बार डीएम और एसएसपी तक मामला पहुंचा लेकिन अफसर चुप्पी साधे रहे ।
वार्ड 53 की पार्षद भावना शर्मा ने पीओ डूडा को कई बार शिकायत की, जिसमें आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर करीब तीन दर्जन गरीब महिलाओं से 15 -15 हजार रुपये की वसूली कर ली गई। पीड़ित महिलाओं ने डूडा और दलालों के खिलाफ प्रदर्शन भी किया है। उसके बावजूद विभाग ने न तो जांच शुरू कराई गई है और न ही रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पीड़ितों की तहरीर पर सीधे रिपोर्ट दर्ज करने से पुलिस ने इंकार कर दिया है। गरीबों से आवेदन कराने के साथ ही वसूली शुरू हो जाती है। उसके बाद हर बार किस्त आने पर 10-10 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। डूडा की जांच एजेंसी ही आवेदकों से वसूली करने के मामले में घिर चुकी है।
ढाई लाख में से 50 हजार दलालों के
मुरादाबाद। प्रधानमंत्री आवास योजना के आवेदन भरने से लेकर आखिरी किश्त लेने के लिए आवेदक को 40 से लेकर 70 हजार रुपये तक अदा करने होते हैं। यह राशि डूडा स्टाफ के नाम पर आधा दर्जन महिलाओं का संगठित गिरोह वसूलता है। आवेदकों से आवेदन के समय एक से दो हजार रुपये लिए जाते हैं। सर्वे टीम के आने पर पांच हजार और स्वीकृति के नाम पर भी पांच - पांच हजार रुपये मांगे जाते हैं। उसके बाद तीन या चार किश्त प्रदान करने से पहले 10-10 हजार रुपये की वसूली होती है। जिन आवेदकों की ओर से यह सुविधा शुल्क नहीं दी जाती है उनकी किश्त किसी न किसी तर्क को देकर रुकवा दी जाती है।
ये शिकायतें डीएम और एसएसपी से की गई थी। इन शिकायतों को मझोला सहित कई थानों में भेजा गया लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस प्रकरण में पीड़ित आवेदकों के साथ-साथ क्षेत्रीय पार्षद भावना शर्मा ने भी शिकायत की थी। करीब दो महीने पुरानी इस शिकायत की पुलिस अभी तक जांच पूरी नहीं कर पाई है। मझोला के थाना प्रभारी विकास सक्सेना ने बताया कि शिकायत करने वालों से कुछ प्रपत्र मांगे थे जो कि नहीं मिले हैं। साथ ही आरोपी महिलाओं ने आश्वासन दिया था कि वह आवेदकों से लिए गए रुपयों को वापस कर देगी।
वसूली के आरोप लगने और कार्यप्रणाली संदिग्ध होने पर पहली एजेंसी को बदल दिया गया है। अब नई एजेंसी से जांच कराई जा रही है। विभाग के नाम पर कोई वसूली करता है तो पीड़ित सीधे रिपोर्ट दर्ज कराए। वार्ड 55 में वसूली होने के मामले में मैं कई बार एसओ मझोला को फोन कर चुका हूं। वसूली में कोई विभाग का हो या बाहर का, जांच के बाद कठोर कार्रवाई की जाएगी। - दीपक कुमार, पीओ डूडा।