मुरादाबाद। महानगर में चारों ओर गंदगी फैली पड़ी है। न तो कूड़े का उठान हो पा रहा है और न ही सफाई। इसको लेकर पार्षदों ने बोर्ड बैठक में हंगामा किया था। पार्षदों ने पूछा कि मुख्यमंत्री के शहर को गंदा बताने के बाद आखिर क्या कदम उठाए गए। नगर आयुक्त ने बताया कि अब नगर में सफाई को नई नई योजना तैयार की गई है। पूरे शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन करने के साथ ही दिन में तीन बार कूड़ा का उठान किया जाएगा।
स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल महानगर के 70 वार्ड में से एक के पार्षद ने भी सफाई व्यवस्था पर संतुष्टि नहीं जताई। पार्षदों ने नगर आयुक्त और नगर स्वास्थ्य अधिकारी पर जमकर भड़ास निकाली। पार्षदों का आरोप था कि न तो सफाई न हो पा रही है और न ही कूड़े का उठान हो रहा है। आलम यह है कि आधे से ज्यादा वार्ड में 20 के स्थान पर पांच-सात कर्मचारी ही सफाई कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की आलोचना के बावजूद कर्मचारियों ने अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं किया है। शहर में चारों ओर दुर्गंध उठ रही हैँ और गंदगी के ढेर लगे हैं। महापौर ने पार्षदों से सहमति जताते हुए कहा कि शहर गंदगी से सड़ रहा है और अफसर जरूरी कदम उठाने को तैयार नहीं हैं।
नगर आयुक्त ने सदन को बताया कि अभी तक दो शिफ्ट में सुबह-शाम कूड़े का उठान कराया जा रहा है। अब हम तीन शिफ्ट में कूड़ा का उठान कराएंगे। सुबह, दोपहर और रात में कूड़े का उठान कराया जाएगा। उसके साथ ही शहर को चार जोन में बांटकर कूड़ा कलेक्शन को कैप्सूल रखवाए जाएंगे। पूरे शहर में घर-घर से कूड़ा एकत्रित कराया जाएगा। नई व्यवस्था दो सप्ताह में काम करने लगेगी।
सफाई कर्मचारी मौजूद रखने पर बेबस अफसर
महानगर में सफाई में हर महीने 50 लाख रुपये का घोटाला होने का आरोप पार्षदों ने लगाया। पार्षदों का आरोप था कि प्रत्येक वार्ड में 20-20 सफाई कर्मचारी तैनात दिखाए जा रहे हैं, जबकि मौंके पर आधे से भी कम कर्मचारी कर रहे हैं। कुछ ही कर्मचारियों के नाम कई वार्ड में दिखाकर वेतन निकाला रहा है। ठेकेदार और अधिकारी मिलकर कर्मचारियों की फर्जी तैनाती दिखा रहे हैं। इसका किसी अधिकारी ने न तो उत्तर दिया और न ही कर्मचारियों को पूरी संख्या में ड्यूटी पर भेजने को कोई पहल करने का भरोसा दिया। नगर आयुक्त ने सफाई कर्मचारियों के आईकार्ड बनवाने का भरोसा जरूर सदन को दिया।