वित्तीय साल के आखिरी दिन 20 करोड़ रुपये लैप्स होने से बच गए। देर शाम तक सरकारी विभागों ने कोषागार इनके बिल भुगतान के लिए पेश किए। बजट लैप्स होने की डर से कई विभागों के कर्मचारी सुबह दस बजे ही बिल बाउचर लेकर कोषागार पहुंच गए। रात आठ बजे तक बिल भुगतान के लिए काउंटरों में भीड़ लगी रही। कोषागार का स्टाफ रात तक बिलों के मिलान और उनका डेटा एकत्र करने में जुटा रहा।
31 मार्च को हजरत अली की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश था। शासन के आदेश पर कोषागार खुला। सुबह दस बजे कर्मचारियों ने अपने काउंटर संभाल लिए। दोपहर बाद बिलों का दबाव बढ़ गया। अधिकतर सरकारी विभागों के बिल दोपहर बाद भुगतान के लिए पहुंचने लगे। रात आठ बजे तक 19 करोड़ 96 लाख 22 हजार 103 रुपये का भुगतान हुआ। जबकि पिछले दस दिनों में कोषागार से एक अरब 64 करोड़ 44 हजार 535 रुपये का भुगतान किया जा चुका है।