मुरादाबाद। लोकसभा चुनाव के समय में राजनेता द्वारा होने वाली घोषणाएं क्या देश हित, समाज हित या निजी हित में की जाती है। क्योंकि इन घोषणाओं का जमीनी हकीकत में आम आदमी तक कितना फायदा पहुंचता है, यह सोचना चाहिए। लाइनपार स्थित केजीके डिग्री कॉलेज में हुई चुनावी चर्चा मेें गंभीर मुद्दों से लेकर शहर के विकास पर चर्चा के दौरान प्रिंसिपल डॉ. एसडी द्विवेदी ने यह अल्फाज कहे।
लाइब्रेरियन विनोद कुमार ने कहा आधा मुरादाबाद लाइनपार में बसा हुआ है, लेकिन पुल नहीं बनने से शहर से कटा हुआ है। इतनी सरकारें आई और गईं क्या यहां के लोगों के बिना मांग उठाए इस दिशा में काम नहीं होना चाहिए था। हिंदी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनीता रानी के मुताबिक शहर के ट्रैफिक को आटोमेटिक सिग्नल सिस्टम से नियंत्रित करना चाहिए। शहर में इतना जाम लगता है। प्रतिदिन हादसे होते हैं। सख्ती से नियमों का पालन कराकर स्थिति को सुधारा क्यों नहीं जाता है। हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष नीरा कश्यप के मुताबिक रामगंगा नदी का आंचल मैला है। ई कचरा आज भी जलाया जाता है। ब्लैक डस्ट आज भी उड़ती है। मनोविज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गीतिका नागर ने कहा सालों से देखते आ रहे हैं लोको पुल का निर्माण चल रहा है, लेकिन पूरा नहीं होता है। रोज लोग जाम में फंसे हुए मिलते हैं। दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर डॉ. एके सिंह और इतिहास के विभागाध्यक्ष डॉ. एसके पंत ने पूछा चुनाव के समय पर बड़ी-बड़ी बातें करनी वाली पार्टियों को ध्यान देना चाहिए कि उन्हें अपने देश को सर्वोपरि रखते हुए ही काम करना है।