आईएफटीएम विश्वविद्यालय में अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा देने के लिए रविवार को बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की भीड़ उमड़ी। अधिकांश विद्यार्थी सुबह आठ बजे से ही एकत्र होने लगे थे और लाइनों में लगकर परीक्षा कक्ष में पहुंचे। विद्यार्थियों का जोश और उत्साह देखते ही बन रहा था।
छात्रवृत्ति परीक्षा में कक्षा नौ, 10, 11 और 12 वीं के 1705 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया। सुबह 11 बजे से प्रस्तावित परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्र - छात्राएं अपने अभिभावकों के साथ सुबह आठ बजे से ही विश्वविद्यालय पहुंचने लगे थे। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पांच - छह जगह नोटिस बोर्ड पर उनके अनुक्रमांक के हिसाब से परीक्षा कक्ष संख्या लिखी हुई थी। फिर भी विद्यार्थियों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए विश्वविद्यालय का स्टाफ हर समय मदद कर रहा था। विवि स्टाफ ने नोटिस बोर्ड में उनका रोल नंबर ढूंढकर उन्हें कक्षों तक पहुंचाया। सुबह साढ़े दस बजे से विद्यार्थियों के कक्ष में पहुंचने के बाद प्रवेश पत्र की जांच की गई और ओएमआर सीट तथा प्रश्नपत्र वितरित किए गए। बुकलेट पर अनुक्रमांक व अन्य विवरण भरने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया था। विद्यार्थी जितनी देर परीक्षा में व्यस्त रहे, उनका इंतजार कर रहे परिजनों के बैठने के लिए भी व्यवस्था की गई थी।
सपनों को पंख देगी छात्रवृत्ति
स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइसेंस एंड एप्लीकेशंस के निदेशक प्रो. राहुल मिश्रा ने बताया कि अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा राष्ट्रीय स्तर पर कई वर्षों से संचालित हो रही है। कहने की आवश्यकता नहीं है कि यह छात्रवृत्ति अति सम्मानजनक व लोकप्रिय योजना है। वर्तमान खर्चीली शिक्षा प्रणाली में छात्रवृत्ति विद्यार्थियों के सपनों को साकार करने में सहायक बनेगी। इसकी एक बानगी गत वर्ष की यूपी बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम रहा, जिसमें प्रदेश के टॉप टेन में स्थान बनाने वाले मुरादाबाद के दोनों छात्रों को अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति मिली थी। विशेषकर जो छात्र-छात्राएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं, उनके लिए यह एक महत्वपूर्ण सहायता है। इस दौरान प्रो. निखिल रस्तोगी, प्रो. इंतजार मेंहदी, प्रो. विकास गुप्ता, डॉ. वैभव त्रिवेदी, प्रो. बीके सिंह आदि मौजूद रहे।
सौ प्रश्न आए थे। इसमें से 87 प्रश्न हल कर दिए। पापा शिक्षक हैं। मेरा सपना इस परीक्षा को उत्तीर्ण करना है, ताकि आगे की पढ़ाई मन लगाकर कर सकूं।
धर्मेश सिंह।
पेपर बहुत अच्छा हुआ है। सामान्य ज्ञान के प्रश्न आसान थे। सभी सौ प्रश्न हल किए हैं। यदि छात्रवृत्ति मिलेगी तो फिर अपने शिक्षक बनने के सपने को साकार करने की कोशिश करूंगी।
हेमा सैनी।
मेरा सपना वकील बनना है। अमर उजाला की ओर से छात्रवृत्ति मिलेगी तो यह मेरे लिए बहुत ही मददगार होगी।
तनु चौधरी।
छात्रवृत्ति परीक्षा फार्म भरने के बाद से ही तैयारी शुरू कर दी थी। पापा के डॉक्टर होने के कारण मेरा सपना भी चिकित्सक बनने का है। छात्रवृत्ति से ट्यूशन खर्च और फीस भर जाएगी।
महक।
काशीपुर से आई हूं। मेरे पिता मजदूरी करते हैं। मेरा सपना चिकित्सक बनने का है। छात्रवृत्ति से पढ़ाई में मदद मिलेगी। हिंदी के प्रश्न सबसे आसान आए थे।
प्रियंका।