किसानों ने चीनी मिलों की बजाय गन्ना विभाग के अफसरों से बकाया मांगने का एलान किया है। भारतीय किसान यूनियन असली पांच नवंबर को गन्ना अफसरों पर तालाबंदी करेगी। किसान नेताओं का कहना है कि गन्ने की बिक्री में विभाग मध्यस्थ रहता है। किसान मिलों को न तो सीधे गन्ना देते हैं और न ही उनसे भुगतान मांगने का हक है।
गन्ना बकाया पर किसानों और चीनी मिलों में तकरार चल रही है। किसान मिलों पर भुगतान करने को दबाव बना रहे हैं। मिलों का नया सत्र शुरू होने वाला है। अभी तक पिछला बकाया नहंी मिला है। सरकार के कर्ज देने के बावजूद मिलों ने तत्काल भुगतान करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। अब किसानों ने भी अपना रुख बदल दिया है। भारतीय किसान यूनियन असली के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह ने एलान किया है कि किसानों का चीनी मिलों से कोई संबंध ही नहीं है। किस किसान को किस मिल पर गन्ना डालना है, कब डालना है, किस मूल्य पर डालना है और किस केंद्र पर डालना है, इसका निर्णय गन्ना विभाग करता है। इसके लिए विभाग गन्ना समितियों की मदद लेता है। समिति खर्च के लिए किसानों से दो रुपये क्विंटल का कमीशन भी काटा जाता है।
कैसे मनाएं धनतेरस-दिवाली
चौधरी हरपाल सिंह ने कहा कि पांच नवंबर को जिला गन्ना अधिकारी और गन्ना उपायुक्त के आफिस पर तालाबंदी की जाएगी। किसानों को भुगतान गन्ना विभाग से चाहिए। शासन से मिलने वाली धनराशि को लेकर गन्ना अफसर किसानों का भुगतान करें। किसानों की जेब खाली है। ऐसे में धनतेरस और दिवाली कैसे मनाएं। धनतेरस के दिन किसान गन्ना अफसरों के यहां तालाबंदी कर धरना देंगे और भुगतान लेने के बाद ही हटेंगे।