रामगंगा के कहर से परेशान अफसर अब इसकेजल प्रवाह की हकीकत का पता लगाने की योजना तैयार कर रहे हैं। अभी तक जिले में केवल रामगंगा का जल स्तर मांपना ही संभव है। उसका गेज केंद्रीय जल बोर्ड ने लगाया हुआ है। उसकेअलावा पानी का बहाव और मात्रा मांपने का कोई तरीका अफसरों के पास नहीं है। ऐसे में बाढ़ नियंत्रण करने और किसानों को पूर्वानुमान जारी करने का काम केवल अनुमान के आधार पर ही किया जा रहा है।
रामगंगा में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा को कालागढ़ और खो डैम पर ही मांपना संभव है। उसके बाद मुरादाबाद तक रामगंगा में छोटी-छोटी 13 नदियों का पानी मिलता है। इसके चलते रामगंगा का प्रवाह और पानी की मात्रा बहुत ज्यादा हो जाती है। सिंचाई, बाए़ नियंत्रण, और केंद्रीय जल बोर्ड के अफसरों को मुरादाबाद में यह तक पता नहीं होता है कि रामगंगा से कितना पानी आगे बढ़ रहा है। इसका प्रवाह कितना है और कितने दबाव की इसकी क्षमता है। यदि इनकी जानकारी हो जाए तो बाढ़ नियंत्रण और तटबंध सुरक्षा का काम आसान हो जाएगा।
रामगंगा की विकरालता को देखते हुए अफसरों ने अब रामगंगा पर मीटर गेज बनाने का निर्णय लिया है।
सीडीओ मृदुल चौधरी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को मीटर गेज का प्रारूप तैयार करने को कहा है। इसकेलिए ऐसा स्थान तलाशा जा रहा है, जहां रामगंगा एक किमी तक बिल्कुल सीधी बहती हो। वहीं पर करीब दो करोड़ की लागत से मीटर गेज की स्थापना की जाएगी। इससे मंडल सहित तीन मंडलों में बाढ़ नियंत्रण में अफसरों को मदद मिलेगी।
सीडीओ के निर्देश पर मीटर गेज बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसका प्रस्ताव तैयार कर शान को भेजा जाएगा। रामगंगा के बहाव और उससे हो रहे नुकसान को देखते हुए मीटर गेज बनना जरूरी है। - डीके सिंह, बाढ़ प्रभारी एक्सईएन मुरादाबाद।