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इल्म के बगैर जिंदगी को मकसद अधूरा- मुफ्ती आकिल

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कुंदरकी। नगर में मदरसा जामिया अरबिया दारूल उलूम रजा ए मुस्तफा में दरजा ए राबिया यानि मौलवियत की पढ़ाई की शरह जामी की किताब का बरेली से तशरीफ लाए मरकजे अहले सुन्नत मंजरे इस्लाम के प्रिसिंपल मुफ्ती मुहम्मद आकिल ने आगाज किया। इस मौके पर मुफ्ती मुहम्मद आकिल ने कहा कि इल्म के बगैर इंसान की जिंदगी का मकसद अधूरा है क्योंकि इल्म की रोशनी में ही इस्लाम को सही ढंग से समझाना जा सकता है। उन्होंने कहा कि पैंगम्बर ए इस्लाम ने इल्म हासिल पर जोर दिया है और फरमाया था कि इल्म हासिल करों चाहे इसके लिए चीन तक जाना पड़े। उन्होंने मुसलमानों से अपने बच्चों को दुनियावी तालीम के साथ दीनी तालीम दिलाने पर जोर देते कहा कि दीनी तालीम से इंसान के दोनों जहां संवरते है। सुन्नी बरेलवी उलेमा फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुफ्ती मुहम्मद इमरान हनफी ने कहा कि मदरसाें में अरबी, फरसी, उर्दू, हिन्दी, अंग्रेसी की तालीम के साथ कम्प्यूटर शिक्षा भी जरूरी है ताकि मदरसों के छात्र भी बदलते परिवेश में किसी भी तरह सें पीछे न रहे। इसके लिए मदरसों के प्रबंधकों को ध्यान देने की जरूरत है। मौलाना अरशद उल कादरी ने छात्रों को नसीहत देते हुए फरमाया कि इल्म के साथ अमल भी जरूरी है। इस मौके पर मदरसे के मोहतमिम कारी वकील अहमद, कारी अब्दुल ह्नफीज, सैय्यद वसीम मियां, मौलाना आशकार, मुफ्ती नईम, मुफ्ती जियाउल मुस्तफा, मुफ्ती खालिद, मौलाना हबीब, मुफ्ती दानिश, मुफ्ती अय्यूब अजहरी, कारी उस्मान, मौलाना हारून, मौलाना ग्यासुद्दीन, कारी इंतेजार, मौलाना शब्बीर, कारी शहादत, पूर्व प्रमुख पति हाफिज मुहम्मद वारिस आदि रहे। अंत में मुफ्ती अय्यबू अजहरी ने भीषण से गर्मी से निजात पाने को बारिश के लिए ने विशेष दुआ कराई।
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