मुरादाबाद। महानगर के लोगों को बरेली से आने वाले मीट का स्वाद पसंद नहीं आ रहा है। ज्यादातर लोग या तो ताजा कट्टी का मीट मांगते हैं या फिर बरेली से बिना फ्रीजर के मीट मंगवाने को प्राथमिकता देते हैं। लोगों का आरोप है कि एसी वैन में आने वाला मीट न तो स्वाद लगता है और न ही रसोई में आसानी से पकता है।
जिले में कोई स्लाटर हाउस नहीं है, जबकि मीट खाने वालों का बड़ा बाजार उपलब्ध है। प्रशासन ने अवैध रूप से होने वाले पशु कटान पर काफी हद तक रोक लगा दी है। इससे मीट आसानी से उपलब्ध नहीं है। इसको लेकर कई बार मीट विक्रेताओं ने डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया था। इसके बाद प्रशासन ने बरेली के स्लाटर हाउस से सुरक्षित एसी वैन में मीट लाने की इजाजत दे दी है। एक सप्ताह से मीट एसी वैन से आकर शहर में उतरता है और फिर बर्फ लगाने के बाद दुकानदारों को दे दिया जाता है। एसी वैन और बर्फ में रखने से मीट कड़ा हो जाता है। इससे यह पकने में देरी करता है। लोगों का आरोप है कि इसमें स्वाद अच्छा नहीं आता है। इसके चलते वह स्थानीय स्तर पर पशु कटान की मांग कर रहे हैं। कई लोग बरेली से बिना एसी वैन के आने वाले मीट को पसंद करते हैं। प्रशासन इसकी अनुमति नहीं देता है।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी महेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि फ्रिज और बर्फ में रखने पर मीट थोड़ा कड़ा हो जाता है। उसको यों ही बनाने से देर लगती है और स्वाद भी प्रभावित होता है। मीट को बनाने से पहले एक घंटे तक सादा पानी में डुबोकर रख दें। उसके बाद वह सामान्य हो जाएगा। किसी हाल में अवैध कटान का मीट प्रयोग न करें और न ही खुले में आने वाले मीट का प्रयोग करें। यह खतरनाक हो सकता है।
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