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ऐसे तो तबाह हो जाएगा हस्तशिल्प उद्योग

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मुरादाबाद। दुनियाभर में मुरादाबाद को पीतल नगरी के नाम से पहचान दिलाने वाला हस्तशिल्प निर्यात उद्योग बंदी की कगार पर पहुंचने को है। 2017-18 में निर्यात 25 प्रतिशत गिरा और अब फरवरी 2019 तक फिर से 10 फीसदी गिरावट के आंकड़ों ने निर्यातकों की नींद उड़ा दी है। शहर से ईरान को होने वाला 500 करोड़ रुपये का निर्यात ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते पहले ही खटाई में पड़ चुका है, अब ट्रंप ने अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर जीएसपी (जनरलाइज सिस्टम ऑफ प्रफेंश) लागू करने का एलान कर निर्यात उद्योग का दम निकाल दिया है। ऐसे में सरकार की ओर मदद की उम्मीद से देख रहे निर्यातक सरकार की उपेक्षा से नाखुश हैं। अमर उजाला में आयोजित फोकस ग्रुप में निर्यातकों ने हस्तशिल्प निर्यात उद्योग की अनदेखी के लिए सरकारों पर जमकर गुस्सा उतारा। निर्यातकों ने कहा कि सरकारों की अनदेखी की वजह से मुरादाबाद का 8500 करोड़ रुपये का हस्तशिल्प निर्यात उद्योग तबाही की कगार पर खड़ा है।
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हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के पूर्व चेयरमैन और निदेशक सुधीर त्यागी ने कहा कि यदि इंडस्ट्री को बचाना है तो सरकार इसे तुरंत जीएसटी से मुक्त करे। 1991 से लेकर 2001 तक 10 वर्षों के लिए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा लागू की गई 80 एचएससी योजना को फिर से लागू किया जाए। इसके तहत हस्तशिल्प निर्यात को आयकर से मुक्त किया गया था। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष 25 प्रतिशत और इस वर्ष फरवरी तक मुरादाबाद का निर्यात 10 प्रतिशत गिर चुका है। ऊपर से अमेरिका जीएसपी लागू करने जा रहा है। जिसके बाद अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी लगेगी और वह महंगे हो जाएंगे। ईपीसीएच के निदेशक नीरज खन्ना ने कहा कि हैंडीक्राफ्ट बोर्ड में निर्यातकों की एक एडवाइजरी कमेटी होनी चाहिए। अभी निर्यातक सरकार के सीधे संपर्क में नहीं हैं। ईपीसीएच निदेशक अब्दुल अजीम ने कहा कि हस्तशिल्प इंडस्ट्री वेंटीलेटर पर है। तुरंत मदद नहीं मिली तो यह खत्म हो जाएगी। भारत की स्पर्धा चीन, वियतनाम, इंडोनेशिया, वियतनाम जैसे देशों से है, सरकार इन देशों की ही तरह निर्यातकों को सुविधाएं दे। ईपीसीएच निदेशक अनूप शंखधार ने कहा कि सरकार निर्यात पर जीरो टैक्स का दावा करती है लेकिन निर्यातों को गैस पर वैट देना पड़ता है। मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष और ईपीसीएच निदेशक नवेद उर रहमान ने कहा कि सरकारी मदद नहीं मिलने की वजह से हमारे उत्पादों की कीमत हमारे प्रतिद्वंदी से अधिक है। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में टिकना बड़ी चुनौती है। युवा निर्यातकों की संस्था यस के सचिव विशाल अग्रवाल ने कहा कि भ्रष्टाचार जरा सा भी कम नहीं हुआ है। फायर, प्रदूषण की एनओसी से लेकर जीएसटी रिफंड तक रिश्वत की खुली मांग होती है। यस के चेयरमैन उदित सरन अग्रवाल ने कहा कि 8500 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा लाने के बावजूद निर्यातक इकाइयों के क्षेत्र में कोई इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। सरकारी विभागों का भ्रष्टाचार निर्यात की राह में बड़ा रोड़ा है। निर्यातक विविध विनय गुलाटी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चीन के सामने तो हम कभी टिक ही नहीं पाते थे अब वियतनाम, फिलिपींस और कंबोडिया जैसे देश भी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारत को पछाड़ रहे हैं। हमारे पास अच्छे डिजाइन हैं लेकिन हम बाजार में नहीं टिकते क्योंकि इन देशों की सरकारें अपने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सुविधाएं और प्रोत्साहन देती हैं। अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने ड्रा बैक की दरें कम कर दीं। बायर्स रेट को लेकर मौल तौल करने लगे हैं। बाकी देश उन्हें सस्ते उत्पाद उपलब्ध करा रहे हैं। मनीष अग्रवाल ने कहा कि विदेशी खरीदारों को सरकार की नीतियों से क्या लेना, उन्हें तो सस्ते उत्पाद चाहिए जो देेने में हम नाकाम हैं। रजत सिंघल ने कहा कि तीन लाख से अधिक लोगों को रोजगार देने के बावजूद हस्तशिल्प उद्योग को सरकार सुविधाएं नहीं देती। सरकार की गलत नीतियों से निर्यात गिर रहा है। एक इंडस्ट्रियल एरिया तक नहीं है। करन दुग्गल ने कहा कि जब सरकार को जीएसटी लौटाना ही होता है तो फिर निर्यातकों से लिया ही क्यों जाता है। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
लघु उद्योग भारती के सचिव अतुल भूटानी ने कहा कि हरियाणा - गुजरात की तरह मुरादाबाद में भी इंडस्ट्रियल एरिया विकसित हो। करोड़ों रुपये विकास शुल्क वसूलने के बावजूद एमडीए और निगम निर्यात उद्योग को बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर तक उपलब्ध नहीं कराते। एमडीए ने जोनल प्लान तक लागू नहीं किया है। एनओसी के नाम पर निर्यातकों का खुलेआम शोषण होता है। लघु उद्योग भारती के प्रांतीय अध्यक्ष अजय गुप्ता उर्फ जिम्मी ने कहा कि प्रदूषण समेत विभिन्न विभागों की एनओसी के नाम पर निर्यातकों से रिश्वत ली जाती है। एमएसएमई सेक्टर में होेने के बावजूद निर्यातकों को फायर एनओसी के लिए एक - एक लाख लीटर के टैंक बनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने भी आक्रोश जताया कि ऑनलाइन सिस्टम होने के बावजूद अफसरशाही निर्यातकों को रिश्वत के लिए परेशान करती है। निर्यातक हेमंत जुनेजा ने भी हस्तशिल्प उद्योग की उपेक्षा पर आक्रोश व्यक्त किया। निर्यातक इस बात से भी खफा थे कि मौजूदा सांसद या फिर उनसे पहले रहे किसी भी सांसद ने कभी भी हस्तशिल्प उद्योग की समस्याओं को संसद में या सरकार के सामने नहीं उठाया।
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