ग्रामीण क्षेत्रों का विकास प्रभावित हो रहा है। प्रधानों के जांच में उलझने से विकास कार्यों की धनराशि खर्च नहीं हो पा रही है। 367 ग्राम प्रधानों के विकास कार्यों की जांच चल रही है। माना जा रहा है गांवों की राजनीतिक खींचतान के चलते प्रधानों की लगातार शिकायत की जा रही हैं। बड़ी संख्या में अधिकारी भी जांच में उलझे हैं।
गांवों के विकास की धनराशि ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव के संयुक्त खाते में पहुंचती है। दोनों के संयुक्त हस्ताक्षर से इस धनराशि को विकास कार्यों पर खर्च किया जाता है। ग्र्राम प्रधानों पर विकास कार्यों में धांधली के आरोप लगते रहते हें। इनकी शिकायत डीएम और सीडीओ से की जाती हैं। इसके चलते कई ग्राम प्रधानों की जांच शुरू कर दी जाती हैं। जिले में ही शिकायतों के बाद विभिन्न स्तरों पर 367 ग्राम प्रधानों की जांच चल रही हैं। इससे एक ओर जहां जिला स्तरीय अधिकारियों को बेवजह जांच में ऊर्जा व समय खर्च करना पड़ता है, वहीं विकास कार्य भी प्रभावित होता है। जिन गांवों के प्रधान शिकायतों का सामना कर रहे हैं। वहां विकास की गति धीमी है। इन गांवों में मात्र 20 फीसदी कार्य ही संपन्न हो पाया है। शिकायत मिलने के बाद उनकी जांच कराना भी जरूरी है, लेकिन इस वृति से अधिकारी परेशान हैं।
जिला पंचायत राज अधिकारी राजेश कुमार सिंह का कहना है कि यदि शिकायतों में समय खराब न हो तो विकास में तेजी आ जाएगी। गांवों में चौपाल लगाकर सभी को विकास के लिए पहल करने का आग्रह किया जाएगा। इसका जिम्मा ग्राम विकास अधिकारियों को सौंपा गया है। जांच में समय बर्बाद नहीं होगा तो विकास कार्य और तेजी से हो सकेंगे।