राज्य वित्त एवं 14 वें वित्त आयोग के 4. 23 करोड़ के गबन के मामले में ग्राम विकास अधिकारी के साथ-साथ प्रधान से भी वसूली की जाएगी। प्रशासनिक और विकास विभाग के अधिकारियों ने यह फैसला नियमों का अध्ययन करने के बाद लिया है। इस जानकारी के बाद पंचायत राज विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। इस आदेश से ग्राम विकास अधिकारियों को थोड़ी राहत मिली है और उन पर आधी वसूली का भार ही पड़ेगा।
जिले की 31 ग्राम पंचायतों में 4.23 करोड़ रुपये का गबन होने का खुलासा आडिट में हुआ है। आडिट टीम ने ग्राम पंचायतों के रिकार्ड में लगाए गए बाउचर जांच में फर्जी पाए थे। इसके आधार पर आडिट टीम ने नोटिस जारी किए थे। ग्राम प्रधान और डीएम के माध्यम से भी नोटिस भेजे गए, लेकिन ग्राम प्रधान, ग्राम्य विकास अधिकारी और ग्राम सचिव सरकारी धनराशि के खर्च का रिकार्ड प्रस्तुत नहीं कर सके। अब यह मामला विधानसभा की कमेटी के सामने पहुंच गया है।
पिछले दिनों तक अधिकारी मानकर चल रहे थे कि ग्राम प्रधानों ने घपला होने के पांच साल तक ही वसूली की जा सकती है। यह घपला 2010-11 का था। ऐसे में वसूली का सारा भार ग्राम विकास अधिकारियों पर पड़ रहा था। शुक्रवार शाम को पंचायत राज विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ने वीडीओ से रिकार्ड तलब किया था। इसकी पत्रावली विधानसभा भेजी जाएगी।
इस मामले में शनिवार को नया मोड़ आ गया। पंचायत राज एक्ट के नियम 256 के प्रतिबंध तीन के अनुसार ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी दोनों से ही इस धनराशि की वसूली की जाएगी। एक्ट के अनुसार घपला या गबन होने के चार साल तक या उक्त ग्राम प्रधान-वीडीओ के पद से मुक्त होने के तीन साल बाद तक वसूली की जाएगी। जिले में ग्राम प्रधान के चुनाव 28 नवंबर 2015 को संपन्न हुए थे। 12 दिसंबर को इसकी मतगणना हुई थी और 28 दिसंबर को शपथ दिलाई गई थी। ऐसे में पूर्व प्रधानों का अधिकार 28 दिसंबर को समाप्त माना जाएगा। उनसे 28 दिसंबर 2018 तक वसूली की जा सकती है।
पंचायत राज एक्ट के अनुसार गबन की धनराशि की वसूली 28 दिसंबर 2018 तक की जा सकेगी। ऐसे में हम जल्दी कर रहे हैं, जिससे विधानसभा में आडिट रिपोर्ट का निर्णय जल्द हो जाए और ग्राम विकास अधिकारियों के साथ ही ग्राम प्रधानों से भी वसूली की जा सके।
- महेंद्र सिंह, डिप्टी डायरेक्टर पंचायत राज।