जिला अस्पताल की ओपीडी में इलाज करवाने के लिए जाने की सोच रहे हैं तो कम से कम अपने दो दिन की छुट्टी की व्यवस्था कर लें। ओपीडी पर्चा बनाने से लेकर डाक्टर को दिखाने और दवा लेने में आपके दो दिन खराब होने तय हैं। अस्पताल में ई-हास्पिटल सेवा लागू होने से मरीजों की सहूलियत के बजाए मुसीबत हो गई है। ई-हास्पिटल सेवा में कंप्यूटराइज्ड पर्चा बन रहे हैं। पर्चा बनाने के लिए काउंटरों पर 11 कर्मियों की जगह मात्र दो कर्मचारियों की तैनाती हुई है। पर्चा बनवाने में ही मरीज और तीमारदारों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। पर्चा बनने का नंबर आने तक ओपीडी का समय खत्म हो रहा है। ओपीडी में जैसे तैसे डाक्टर को दिखवा भी लिया तो दवाखाना के खुलने का टाइम खत्म हो रहा है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब डेढ़ हजार मरीज पहुंचते हैं। सीजनल वायरल फैलने पर ओपीडी दो हजार से अधिक पहुंच जाती है। मरीजों के दबाव में डाक्टर गिनती के हैं। पहले ही मरीजों को डाक्टरों के चैंबर के बाहर घंटों इंतजार करना पड़ता था। ई-हास्पिटल सेवा में ओपीडी पर्चे कंप्यूटराइज्ड बनने लगे हैं। पर्चे में मरीज को यूनिवर्सल आईडी नंबर आवंटित हो रहा है। कंप्यूटराइज्ड पर्चे बनाने के लिए मात्र दो कर्मियों की ड्यूटी लगी है। मैनुअल पर्चे के काउंटर पर जाने वाले मरीजों को कंप्यूटराइज्ड काउंटर पर भेजा जा रहा है।
आनलाइन पर्चा बनने से समय भी मैनुअल की तुलना में तीन गुने से अधिक लग रहा है। पर्चे में मरीज, उसके पिता के नाम के अलावा पता, टेलीफोन नंबर, आधार कार्ड नंबर और ओपीडी कक्ष के डाक्टर का नाम का नंबर प्रिंट हो रहा है। पर्चा बनाने के बाद डाक्टरों के चैंबरों के बाहर भी लाइन लग रही है। ओपीडी का टाइम खत्म होने से कई मरीज वापस लौट रहे हैं। मरीज जियाउद्दीन के मुताबिक पर्चा बनाकर डाक्टर को दिखाने में चार घंटे लग गए। डाक्टर को दिखाने पहुंचा तो दो बजे बाद दवाखाना बंद हो गया। जियाउद्दीन की तरह कई ऐसे मरीज हैं जो एक दिन पर्चा बनाकर दूसरे दिन डाक्टर को दिखाने और दवा लेने पहुंच रहे हैं।
- पर्चे काउंटर पर 11 कर्मियों की तैनाती नहीं होने तक समस्या बनी रहेगी। हालांकि, मैनुअल पर्चे भी बनाए जा रहे हैं। - ज्योत्सना पंत, सीएमएस