जेल भूमि घोटाले और सीलिंग भूमि घोटाले की जांच कर रही विजिलेंस एमडीए के बाद बुधवार को कलक्ट्रेट पहुंची। टीम ने घोटाले के दस्तावेज जुटाने के साथ संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ भी की। दोनों घोटालों में पूर्व डीएम जुहैर बिन सगीर, सेवानिवृत्त एडीएम सिटी अरुण कुमार श्रीवास्तव समेत 12 सरकारी ओहदेदारों का नाम शामिल है। जिला प्रशासन आखिर तक आरोपियों को बचाने की कोशिश में जुटा था। शासन के आदेश पर हुई विजिलेंस जांच के बाद मामले में अफसरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है।
पूर्व डीएम जुहैर बिन सगीर पर आरोप है कि उन्होंने एमडीए के कब्जे वाली अर्बन सीलिंग की करीब 68000 वर्ग मीटर भूमि बगैर किसी अधिकार के कथित किसानों के पक्ष में बगैर एमडीए का पक्ष सुने छोड़ दी थी। विजिलेंस जांच में इन आदेशों के पीछे प्रापर्टी डीलरों का सिंडिकेट उजागर हुआ है। दो - दो पूर्व कमिश्नरों एल वेंकटेश्वर लू और राजेश कुमार सिंह के आदेश के बाद भी जिला प्रशासन ने आरोपी अफसरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी। बाद में शासन के आदेश पर पूर्व डीएम, पूर्व एडीएम सिटी समेत 12 अधिकारियों के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में घोटाले की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। जेल भूमि घोटाले में भी पूर्व समेत 13 लोगों के खिलाफ विजिलेंस ने मूंढापांडे थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मुकदमों की तफ्तीश के सिलसिले में विजिलेंस ने चार दिन पहले एमडीए जाकर अभियंताओं के बयान दर्ज किए थे। बुधवार को टीम कलक्ट्रेट पहुंची और संबंधित रिकार्ड की जांच कर कर्मचारियों से पूछताछ की।