भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने पैकिंग करते समय दूध में विटामिन मिलाना अनिवार्य कर दिया है। दूध में इन पोषक तत्वों की कमी पाई जा रही थी। दूध को पैक करने से पहले प्रोसेसिंग के दौरान ज्यादातर सूक्ष्म पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के अधिकारियों ने माना है कि शरीर के लिए ताजा दूध सबसे बेहतरीन है। दूध को पैक करने से पहले प्रोसेस के दौरान ज्यादातर सूक्ष्म पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। प्रोसेस में थाइमिन, रिबोफ्लाविन, विटामिन बी-12, नियासिन, पैंटोफेनीक एसिड, विटामिन बी-6, विटामिन सी, फोलेट की मात्रा कम हो जाती है। दूध की वसा में विटामिन ए, डी, ई और के घुलनशील होते हैं। ऐसे दूध का सेवन करने से कुपोषण की समस्या बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार एक तिहाई आबादी पोषक तत्वों की कमी से जूझ रही है। छह साल से छोटे 57 फीसदी बच्चों में विटामिन ए की कमी पाई जा रही है। इससे नाइट ब्लाइंडनेस की समस्या उत्पन्न हो रही है। वहीं 69 फीसदी महिलाओं और बच्चों में विटामिन डी की कमी हो रही है। विशेषज्ञों के पैनल के अनुसार दूध में 770 माइक्रोग्राम प्रति लीटर विटामिन ए और 550 माइक्रोग्राम प्रति लीटर विटामिन डी मिलाया जा रहा है। इस पर तीन से चार पैसे प्रति लीटर का खर्च जाता है। देश में 24 कोऑपरेटिव और 15 प्राइवेट डेयरियों ने इसको मिलाना शुरू कर दिया है। जल्द ही सभी डेयरियां इसको मिलाना शुरू कर देंगी। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी महेेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि दूध में पोषक तत्व मिलाने के आदेश प्राप्त हो गए हैं। कुछ डेयरियों ने मिलाना भी शुरू कर दिया है। इसके साथ ही दूध की परीक्षण प्रक्रिया में भी बदलाव किया जा रहा है।
शासन से विटामिन ए और डी मिलाने के आदेश प्राप्त हो गए हैं। हमने इसका प्रस्ताव तैयार कर स्टेट मैनेजमेंट को भेज दिया है। वहां से स्वीकृति मिलते ही दो-तीन सप्ताह में इनका मिश्रण शुरू करा दिया जाएगा। इससे दूध की पौष्टिकता बढ़ जाएगी।
- एसएस राणा, जीएम पराग।