रामगंगा किनारे सिंचाई विभाग के क्षेत्र में मनमाने तरीके से प्लाटिंग की जा रही है। इससे रामगंगा का बहाव क्षेत्र कम होता जा रहा है। कई मकानों की नींव रामगंगा के पानी में घिर गई हैं। इसके बावजूद मुख्य प्रवाह के किनारे तक पर आवास के लिए प्लाट काटे जा रहे हैं।
नदियों का अपना प्रवाह क्षेत्र होता है। बरसात में नदियां अपने क्षेत्र तक बहने लगती हैं। इसको प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया जाता है। ऐसे क्षेत्र में निर्माण पर रोक लगी होती है। अवैध निर्माण करने वालों ने रामगंगा के इसी प्रतिबंधित क्षेत्र को कब्जाना शुरू कर दिया है। रामगंगा के किनारे के तक मकानों की नींव भरी हुई है। किनारे की नींव पानी में डूब चुकी हैं। उसके बावजूद प्लाटिंग की जा रही है। प्रतिबंधित क्षेत्र में प्लाट लेकर ऊंचा भराव करके लोग मकान बना लेते हैं। इससे बरसात में रामगंगा की धारा का प्रवाह प्रभावित होता है। इसके चलते नदी की धारा कटान शुरू कर देती है और नीचे वाले क्षेत्रों में पानी भर जाता है। एमडीए, नगर निगम और सिंचाई विभाग के अधिकारी अवैध निर्माण को रोकने की पहल नहीं कर रहे हैं।
अवैध खनन के चलते बदल रही है रामगंगा की धारा
रामगंगा में शहर की दिशा में धड़ल्ले से अवैध खनन किया जाता रहा है। बरसात शुरू होने से पहले यहां रात में खनन किया जाता था। जेसीबी से खनन होने से नदी की एक दिशा नीची हो जाती है। पानी बढ़ने पर नीचे की ओर तेज प्रवाह होता है। इससे कटान भी ज्यादा होता है। यही कारण है कि रामगंगा शहर की ओर ज्यादा कटान कर रही है, जबकि दूसरी दिशा में रामगंगा का पानी उतनी तेजी से खेतों-बागों की ओर नहीं बढ़ा है।