गांवों और कस्बों में प्रचलित मसाले वाला गुड़ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इस गुड़ को चमकदार बनाने के लिए कोई मसाला नहीं डाला जाता। बल्कि इसमें सोडियम थायो सल्फेट केमिकल डालकर सफेद और चमकीला बनाया जाता है। ऐसा गुड़ आकर्षक तो होता है लेकिन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। गुड़ में इस केमिकल को न मिलाने केबारे में प्रदेश के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के आयुक्त ने निर्देश जारी किए हैं। जिसमें आम जनता के साथ-साथ कोल्हू संचालकों को जागरुक करने को कहा गया है।
मुरादाबाद जिले में पिछले साल की तुलना में इस साल ज्यादा कोल्हू संचालित हैं। इन दिनों कोल्हू की संख्या एक सौ से अधिक बताई जा रही है। यहां पर पिछले साल की तुलना में करीब 15 फीसदी अधिक गन्ने की पैराई कर गुड़ बनाया जा रहा है। जिसमें सोडियम थायो सल्फेट केमिकल मिलाए जाने की जानकारी हुई है। इस केमिकल का इस्तेमाल मुरादाबाद के अलावा बरेली, मेरठ और सहारनपुर में भी गुड़ बनाने वाले कोल्हू में किया जा रहा है।
जिला अभिहित अधिकारी विनोद कुमार सिंह का कहना है कि आयुक्त केनिर्देश पर यहां केसभी कोल्हू संचालकों को इस खतरनाक केमिकल के बारे में आगाह कर दिया गया है। आढ़तियों और आम आदमी को भी जागरुक किया जा रहा है कि वह सफेद और चमकीले वाले गुड़ को इस्तेमाल करने से बचें।
एफएसडीए प्रयोगशाला की रिपोर्ट केअनुसार गुड़ में इस केमिकल के होने के कारण अधिक सेवन करने पर व्यक्ति के लिवर में सूजन आ जाती है। बाद में पाचनतंत्र बिगड़ सकता है। जिसके स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम होते हैं। उन्होंने बताया कि कोल्हू संचालक गुड़ बनाते समय रस को गर्म करने को दौरान उफान को दबाने के लिए अरंडी के तेल का इस्तेमाल करते हैं। उन्हें अरंडी के स्थान पर सरसों के तेल का इस्तेमाल करना चाहिए। क्योंकि अरंडी केतेल को भी स्वास्थ्य के लिए घातक माना गया है।