मुरादाबाद।
महीनों से ट्रेनों की लेटलतीफी झेल रहे मुसाफिरों को धमौरा हादसे ने डरा दिया। गनीमत रही कि ट्रेन के सभी कोच खाली थे। अगर यात्री होते तो भयंकर हादसा हो सकता था। ये बात रेल अफसर भी जानते हैं और खुद मुसाफिर भी इससे अंजान नहीं। धमौरा हादसे के बाद जहां यात्री डरे और सहमे हैं, वहीं अफसरों के माथे पर ही चिंता की लकीरें पड़ गईं। आए दिन हो रहे रेल हादसों के बाद यात्रियों ने कहा कि उन्हें हाई स्पीड ट्रेन मिले न मिले, लेकिन उनका सफर सुरक्षित और समय से होना चाहिए। मुरादाबाद से लखनऊ जाने को घर से निकले आले हसन ने कहा कि ट्रेनों पहले से घंटों देरी से चल रही हैं। पांच घंटे जाने के लिए दस घंटे स्टेशन पर बैठकर ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है। रेलवे यात्री सुविधा और सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। गनेश ने कहा कि ट्रैक बदलने के नाम पर ट्रेनों को लेट तो किया जाता है। लेकिन कहीं ट्रैक बदलता दिखाई नहीं देता। जबकि ट्रैक नया डाल दिया गया है तो बार बार ट्रैक चटकने की शिकायत क्यों आ रही हैं। आजाद दुबे ने बताया कि वह अपने घर से लखनऊ के लिए निकले थे। उनकी गाड़ी पर भी समय पर आने वाली थी। इसी दौरान धमौरा में पटरी से ट्रेन उतरने की जानकारी मिल गई। इसके बाद उसे बस के जरिये लखनऊ को सफर तय करना पड़ा। महेश कुमार ने बताया कि रेलवे यहां सेमी हाई स्पीड और मेमू जैसे ट्रेनें चलाने का दावा ठोक रहा है। अगर इसी तरह से हादसे होते रहे तो फिर इन ट्रेनों का क्या फायदा।