यदि आपके नौनिहालों ने पोलियो की खुराक पी है तो एहतियातन इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन (आईपीवी) का टीका लगवा लें। इससे बच्चों में पोलियो वायरस से लड़ने की डबल सुरक्षा मिलेगी। खासकर, साढ़े तीन माह की उम्र तक के बच्चों के लिए आईपीवी जरूरी है और सभी सरकारी अस्पतालों में इसका टीका लग रहा है।
राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में बच्चों को बायोमेड कंपनी की ओरल पोलियो वैक्सीन पिलाई जा रही थी। कंपनी की वैक्सीन में पी-2 वायरस पाए जाने के बाद सरकार ने उत्तर प्रदेश में दवा पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में साढ़े तीन माह की उम्र तक के जिन बच्चों ने पोलियो की दवा पी है और आईपीवी नहीं लगवाया है उनके लिए खतरा बढ़ गया है। अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी अस्पतालों में आईपीवी लगवा लें। हालांकि, साढ़े तीन माह से अधिक उम्र के बच्चों में पोलियो वायरस का खतरा कम है। इसके बाद भी सुरक्षा के लिहाज से पोलियो की दवा पीने वाले सभी उम्र के बच्चों की विश्व स्वास्थ्य संगठन निगरानी कर रहा है।
- बायोमेड कंपनी की पोलियो वैक्सीन पीने वाले बच्चों के अभिभावकों में दहशत है। मेरी भी सात माह की बेटी अनन्या है। उसने पोलियो की वैक्सीन पी है और आईपीवी नहीं लगा है। अब क्या करूं कोई बताने को तैयार नहीं है। - डा. सौम्या
- बेटी सना दो साल की है। उसे आईपीवी नहीं लगा है, जबकि पोलियो की खुराक पी है। सरकारी अस्पताल में आईपीवी लगाने से मना कर दिया। डाक्टरों ने बताया कि साढ़े तीन माह के बच्चों को ही आईपीवी लगाया जा रहा है। इससे अधिक उम्र के बच्चों को आईपीवी लगाने का आदेश नहीं आया है। - अजीम, मकबरा फाटक
- पोलियो वैक्सीन पीने वाले सभी बच्चों की निगरानी हो रही है। स्वास्थ्य विभाग दो महीने का टीकाकरण अभियान चलाने जा रहा है। पहले चरण के लिए अति संवेदनशील इलाकों को चिह्नित करने के आदेश दे दिए हैं। इसमें बच्चों को सभी तरह के टीके लगाए जाएंगे। खासकर, साढ़े तीन माह की उम्र तक के बच्चों को आईपीवी लगाया जाएगा। - डा. विनीता अग्निहोत्री, सीएमओ