केंद्र सरकार की ओर से तीन तलाक अध्यादेश पर कैबिनेट के मंजूरी मिलते ही तीन तलाक पीड़िताओं की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। तलाक के दंश ने इन महिलाओं की हंसती-खेलती जिंदगी को बर्बाद कर दिया है। रिश्तों को बचाने के लिए नाते-रिश्तेदार से लेकर थाने की चौखट पर उम्मीदें लेकर पहुंची। हर जगह से नाउम्मीद होने के बाद अब वह न्याय पाने के लिए दर-दर की ठोकर खा रही हैं। ऐसे में कैबिनेट का अध्यादेश तीन तलाक के जख्मों पर मरहम जैसे लग रहे हैं। कहा कि महिलाओं का पक्ष मजबूत हुआ है। भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगने की पूरी संभावना है।
मेरी शादी बिहार में हुई थी। शादी के दूसरे-तीसरे दिन से ही अतिरिक्त दहेज की मांग होने लगी। जब असमर्थता जताई तो मारपीट की गई और हाथ तोड़ दिया। मायके से रुपये लाने की कहते हुए घर से निकाल दिया और बाद में तीन तलाक दे दिया। अब खर्च भी नहीं देते हैं। सरकार की पहल से मुझे मदद मिलेगी।
मरियम, तलाक पीड़िता।
मेरी शादी दौलतबाग निवासी युवक के साथ हुई थी। ससुराल जाकर पता चला कि ससुरालीजन रुपयों के लिए कई-कई शादियां करते हैं। ससुर ने तीन शादियां कीं, जबकि जेठ ने दो शादी कीं और ननद भी शादी के बाद अपनी ससुराल से रुपये लेकर लौट आई। मुझे भी अतिरिक्त दहेज लाने के लिए घर से निकाल दिया और बाद में तीन तलाक दे दिया। महिलाओं के पक्ष में अब उम्मीदें बंधी हैं।
वरीशा, तलाक पीड़िता।
मुगलपुरा निवासी युवक से शादी हुई थी। बाद में और रुपये मांग रहे थे। जब नहीं दिए तो रोजाना मारपीट की जाने लगी और घर से निकाल दिया। मेरी छह बहनें और दो भाई हैं। पिता नहीं हैं। मुकदमा दर्ज करवाया था, लेकिन वह पुलिसकर्मी होने की वजह से बहुत फायदा नहीं मिला। अंत में कोर्ट के माध्यम से तलाक लिया।
शबनम, तलाक पीड़िता।