मंडलायुक्त अनिल राजकुमार शुक्रवार को अचानक एमडीए कार्यालय पहुंच गए। शिकायत पटल से ही उन्हाेंने कर्मचारियों से सवाल जवाब शुरू कर दिए। कमिश्नर के अचानक दौरे से कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। तीसरी मंजिल तक एक - एक कर सभी विभागों में पहुंचे कमिश्नर ने रिकार्ड का रखरखाव और शिकायतों के निस्तारण की स्थिति भी देखी। निरीक्षण के बाद बैठक में कमिश्नर ने कहा कि नया मुरादाबाद में करोड़ों की लागत से बना एमडीए का नया आफिस खंडहर हो रहा है। एमडीए इसे बेच दे या फिर वहां कार्यालय शिफ्ट किया जाए।
प्राधिकरण दफ्तर पहुंचते ही कमिश्नर ने शिकायत पटल पर शिकायत रजिस्टर चेक किया। पिछले तीन दिन में एक भी शिकायत दर्ज नहीं होने पर उन्हाेंने हैरत जताते हुए कर्मचारी से सवाल - जवाब किए। निरीक्षण के दौरान कुछेक पटल पर रिकार्ड व्यवस्थित नहीं था। निरीक्षण के बाद सभागार में प्राधिकरण अधिकारियों और अभियंताओं के साथ बैठक में उन्होंने शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा की। कमिश्नर द्वारा मार्क की गई शिकायतों का निस्तारण नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी जताई। कमिश्नर ने कहा कि नया मुरादाबाद में बने आफिस को नौ माह पहले हुई बोर्ड बैठक में बेचने का फैसला किया गया था। इसे बेचने के लिए अभी तक कोई कोशिश नहीं हुई। कमिश्नर ने कहा कि ऐसे खड़े - खड़े इमारत खंडहर हो जाएगी। यदि वहां शिफ्ट नहीं करना है तो उसे बेचा जाए। निरीक्षण के दौरान प्राधिकरण उपाध्यक्ष कनक त्रिपाठी व एमडीए के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।