एसटीपी : रहेंगे बेचारे ... इलाके गंगा किनारे वाले
- रामगंगा किनारे के इलाकों का गंदा पानी नहीं पहुंचेगा एसटीपी तक
- शहर का मात्र एक चौथाई हिस्सा एसटीपी प्लान के कवरेज
- तीन हिस्सों को कवरेज में लाने के लिए अभी तैयार नहीं है योजना
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद।
रामगंगा स्वच्छता अभियान के लिए महानगर में शुरू किए गए सीवर व एसटीपी इसमें कारगर होते नहीं दिख रहे हैं। इसका कारण प्लान की कमी को माना जा रहा है। महानगर के रामगंगा किनारे के क्षेत्रों में न तो सीवर डाला जा रहा है और न ही इस क्षेत्र के नालों को एसटीपी तक लाया गया है।
रामगंगा को साफ रखना शासन की प्राथमिकता में है। गंगा की सहायक नदियों में रामगंगा शामिल है। इसकेचलते रामगंगा स्वच्छता को भी अभियान चलाए जा रहे हैं। शासन ने गंगा किनारे के सभी गांवों-कस्बों में एसटीपी अनिवार्य कर दिया है। इसी क्रम में मुरादाबाद में सीवर डालने और एसटीपी बनाने की योजना शुरू की गई थी। शहर को चार हिस्सों में बांटकर इस प्लान को लागू किया गया था। पहले चरण में शहर के जोन प्रथम को शामिल किया गया है। इस 279.91 करोड़ की लागत वाली योजना में 264 किमी सीवर डाली जानी है।
प्रथम चरण में महानगर के 16 नालों को टेप किया जाना है। इनमें से सभी नाले प्रथम जोन के हैं। इनमें रामगंगा किनारे का क्षेत्र नहीं है। ऐसे में रामगंगा स्वच्छता अभियान का सपना पूरा नहीं होगा। जल निगम अफसरों के अनुसार शासन को महानगर के बाकी तीनों जोन की योजना जारी करनी होगी, जिसकी अभी तक कोई नहीं है। इसके अलावा नगर निगम महानगर को चार जोन् में बांटे गए हिस्सों में बदलाव कर सकता है। इसमें दूसरे चरण में रामगंगा किनारे केपूरे हिस्सों को लिया जा सकता है। ऐसे में दूसरेचरण की कार्ययोजना स्वीकृत होने के बाद रामगंगा की स्वच्छता में कामयाबी मिल सकेगी।
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नगर को चार जोन में बांटकर एसटीपी प्लान किया गया है। पहले चरण की योजना शुरू कर दी गई है, इसमें रामगंगा किनारे का ज्यादातर हिस्सा नहीं आता है। अन्य तीन चरणों की योजना का कोई प्रस्ताव अभी स्वीकृत नहीं हुआ है।
- महेंद्र सिंह, एक्सईएन - आरओ, सीवर प्लान जल निगम।
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