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सोत के बाद अब महावा नदी की खुदाई भी शुरू

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धनारी/चंदौसी। जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने पुलिस अधीक्षक व गुन्नौर के विधायक की मौजूदगी जिले की दूसरी नदी महावा के सीमांकन के बाद मंगलवार को सैंडोरा गांव स्थित बाबा चंद्रदेव की मढ़ी पर मंत्रोच्चार के बीच विधि विधान से हवन पूजन के बाद फावड़ा चलाकर खुदाई का शुभारंभ किया। इस मौके पर जिलाधिकारी ने कहा कि प्रयास किया जाएगा कि मानसून आने से पहले ही महावा नदी की खुदाई के कार्य को पूरा कर लिया जाए। विधायक अजित कुमार राजू ने भी कार्य को पूर्ण सहयोग देने का वादा किया।
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तीन दशक पूर्व तक जिले की सदानीरा कहलाने वाली महावा नदी के दिन एक बार फिर बहुरेंगे। इसकी उम्मीद अब अमर उजाला के कहां गए जलस्रोत मुहिम पर जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह की गंभीरता से जगी है। नदी का सीमांकन तो कई दिन पहले ही शुरू हो गया था। जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह, पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद, सीडीओ उमेश कुमार त्यागी, एसडीएम ओमवीर सिंह, दीपेंद्र यादव, महेश प्रसाद दीक्षित, बीडीओ शिखर श्रीवास्तव, अनुराग भटनागर सहित कई अधिकारियों के अलावा गुन्नौर के भाजपा विधायक अजित कुमार राजू भी रजपुरा ब्लाक के गंगा किनारे सिंडौरा गांव में बनी बाबा चंद्रदेव महाराज की मढ़ी में पहुंचे। यहां जिला प्रशासन
द्वारा पंडाल लगाकर गोष्ठी का आयोजन भी रखा।
ग्रामीण भी बड़ी संख्या में पहुंचे थे। पंडित शिवभक्त शर्मा के मंत्रोच्चार के बाद जिलाधिकारी, एसपी, विधायक आदि ने हवन में आहुतियां दी। पूजा अर्चना के बाद तीनों ने फाबडा चलाकर नदी की खुदाई का आरंभ किया। इसके बाद यहां दो जेसीबी व मनरेगा श्रमिकों ने खुदाई का कार्य तेजी के साथ शुरू कर दिया। अधिकारियों ने पौधरोपण किया। इससे पूर्व यहां आयोजित खुदाई समारोह में जिलाधिकारी ने कहा कि बिना जल और वायु के जीवन की परिकल्पना नहीं की सकती है। महावा नदी खेती को सिंचित करती है, उसे असंख्य पेड़ पौधों को भी जीवन मिलेगा, जिससे पर्यावरण शुद्ध होगा।
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खुदाई कार्य में जनसहयोग आवश्यक है। क्योंकि मनरेगा से श्रमिक तो मिल जाएंगे लेकिन जेसीबी आदि का खर्च जनसहयोग से ही हो सकता है। चेन्नई आज एक एक बूंद पानी के लिए तरस रहा है। इसलिए हमें पानी की कीमत समझते हुए जलबचत का संकल्प लेना होगा।
सीडीओ उमेश कुमार त्यागी ने कहा कि महावा नदी में खुदाई का कार्य आरंभ कर दिया गया। मनरेगा के अंतर्गत पौधरोपण, जलाशय का निर्माग्, पुराने नाले की सफाई, नदी की खुदाई आदि कार्य कराए जा सकते हैं। पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद ने कहा कि नदी का विलुप्त होना किसी अभिशाप से कम नहीं है। नदी को चालू करने के लिए जनसहयोग बहुत जरूरी है।उप जिलाधिकारी ओमवीर सिंह ने कहा कि नदी का सीमांकन 50 मीटर उधर और 50 मीटर उधर किया जा रहा है। किसी किसान को नदी की जगह पर हक नहीं दिया जाएगा।

महावा नदी की खुदाई का कार्य पांच चरणों में विभाजित
-गुन्नौर एसडीएम ओमवीर सिंह ने बताया कि महावा नदी की पैमाइश में टीमो को कठिनाई आ रही हैं। नदी के सूखने के बाद लोगों ने अपने पट्टे करा लिए हैं, उन पर पटटों को संक्रमणीय भूमिधर भी हो गए हैं। चकबंदी के दौरान तो जमीन गायब हो गई है। लोगो को तलाब पोखर सभी जगहों पर चक काट दिए। अब इसका दुरुस्तीकरण किया जाएगा।
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-मनरेगा से श्रमिक मिल जाएंगे, लेकिन कई अन्य कार्य ऐसे भी है, जिनमें धन की आवश्यकता होगी। जेसीबी आदि भी लानी होगी। इसके लिए एक गैर सरकारी समिति गठित की जाएगी। जिसमें संबंधित गांवों के ही लोग होंगे। जो बैंक खाता खुलवाकर स्वेच्छा से धन संग्रह करेगी। जिससे नदी की खुदाई पर अतिरिक्त व्यय किया जाएगा।
-शिखर श्रीवास्तव, बीडीओ/कार्यक्रम अधिकारी।
-हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि मानूसनी बारिश से पहले ही महावा नदी की खुदाई का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। लगातार हर रोज कार्य की मानीटरिंग की जा रही है। ताकि इसी बरसात में महावा नदी बहती हुई दिखाई दे। इसमें अतिक्रमणकारियों के साथ किसी तरह की कोई रियासत नहीं की जाएगी। नदी की जमीन हर हाल में छोड़नी ही होगी। -अविनाश कृष्ण सिंह, जिलाधिकारी संभल।
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