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खेल कोटे से भर्ती न होने से भटक रहे खिलाड़ी

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मुरादाबाद। खेलों में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग कर और पदक जीतकर शहर व परिजनों का नाम रोशन करने के बाद भी खिलाड़ियों का भविष्य अंधकारमय है। वह एक नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। उनका कहना है कि यूपी सरकार की ओर से स्थानीय निकायों में खेल कोटा नहीं खोलने की वजह से समस्या उत्पन्न हो रही है। उन्होंने खेल के विकास और अपने बेहतर भविष्य की खातिर खेल कोटा लागू करने की मांग की है।
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वालीबाल का खिलाड़ी हूं। वर्ष 2015 में यूथ नेशनल में स्वर्ण पदक जीता था। कई जगह भर्तियां देखती हैं। वर्ष 2012 से नौकरी की तलाश में हूं, लेकिन खेल कोटा न होने की वजह से नौकरी नहीं मिल रही है। सरकार वायदे बहुत करती है, लेकिन रोजगार के नाम पर कुछ नहीं हो रहा है। नौकरी लगने के बाद विभागीय प्रतियोगिताओं में भी राष्ट्रीय स्तर तक खेलते हैं। इससे खेल का विकास होता है।
सलमान अहमद, पीटीसी परिसर।

वर्ष 2007 से बॉक्सिंग के खेल में हूं। वर्ष 2012 में यूथ नेशनल में स्वर्ण, 2018 में सीनियर चैंपियनशिप में प्रतिभाग, पांच आल इंडिया यूनिवर्सिटी में दो कांस्य पदक, दो सेंट्रल जोन में कांस्य पदक के अलावा तीन बार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर चुका हूं। लाखों रुपये खर्च हो गए हैं। पापा किसान हैं। शहर में रहने का खर्च अलग है, लेकिन नौकरी नहीं मिली।
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रवि कुमार, उमरी कला।

वर्ष 2015 में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग और वर्ष 2016 में राष्ट्रीय स्तर पर एथलेटिक्स प्रतियोेगिता में रजत हासिल किया था। एसएससी, यूपी पुलिस में आवेदन किया था। हैदराबाद में भी नौकरी के लिए ट्रायल देने गया था। दो सौ मीटर की दौड़ में सबसे आगे था, लेकिन अंतिम सूची में किस कारण से नाम नहीं आया, पता नहीं चल सका। किराए पर रहकर स्टेडियम में अभ्यास करता हूं। प्रदेश सरकार के विभागों में यदि खेल कोटे से नौकरी मिले, तो सभी के लिए बेहतर रहेगा।
अजय कुमार, बिजनौर।


रोडवेज, बिजली, सेतु निगम, डाक विभाग, शुगर कारपोरेशन, एलआईसी के अलावा अन्य कई विभाग हैं, जहां खेल कोटे से भर्ती नहीं हो पा रही है। पुलिस में यदि 35 हजार सामान्य भर्ती होती है तो कम से कम डेढ़ से दो हजार खिलाड़ियों के लिए रिक्तियां होनी चाहिए। खिलाड़ियों के सपनों का पूरा करने में परिजनों भी बहुत परेशानी उठाते हैं। इसलिए खेल कोटा की भर्तियां निकलना बहुत आवश्यक है।
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प्रणदीप सिंह गिल, अध्यक्ष, यूपी वालीबाल एसोसिएशन।
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