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मध्याह्न पोषाहार घोटाले में वसूली के आदेश

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मुरादाबाद। मध्याह्न पोषाहार योजना में गेहूं घोटाले पर करीब 21 साल बाद शासन ने कार्यवाही करते हुए पुलिस लाइन मुरादाबाद के तत्कालीन प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्यवाही कर वसूली के आदेश जारी किए हैं। तत्कालीन प्रधानाध्यापक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उस वक्त जिले में कई स्कूलों में भी गेहूं घोटाला हुआ था। विजिलेंस जांच में इसकी पुष्टि है। गेहूं घोटाले पर शासन की कार्यवाही एवं वसूली के आदेश से बीएसए कार्यालय में खलबली मची है।
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2004 से पूर्व सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन वितरण की जगह मध्याह्न पोषाहार योजना संचालित होती थी। इसमें कक्षा में 80 फीसदी उपस्थिति दर्ज करने वाले प्रत्येक बच्चे को हर महीने में तीन किलो गेहूं मिलता था। 1998 में मुरादाबाद जिले में तत्कालीन अधिकारियों एवं स्कूल प्रधानाचार्यों ने योजना में अनियमितताएं की गई। प्राथमिक स्कूल पुलिस लाइन मुरादाबाद में भी घोटाला हुआ। अक्तूबर माह में स्कूल में कक्षा एक से पांचवीं तक 80 फीसदी छात्र उपस्थिति दर्शाकर गेहूं का घोटाला हुआ। शिकायतों पर 1999 में इसकी विभागीय जांच हुई। बाद में इसकी विजिलेंस जांच की गई। विजिलेंस जांच में पुलिस लाइन स्थित प्राथमिक विद्यालय में गड़बड़ी की पुष्टि हुई। जबकि अन्य कई स्कूलों में भी तत्कालीन अधिकारियों और विजिलेंस जांच में छात्र उपस्थिति अलग-अलग मिली।
शिक्षा सचिव रुबी सिंह ने पुलिस लाइन स्कूल के तत्कालीन प्रधानाध्यापक सुरेश चंद्र रस्तौगी के खिलाफ कार्यवाही कर गेहूं घोटाले की वसूली करने के आदेश दिए हैं। अपर निदेशक कार्यालय से मंगलवार को बीएसए कार्यालय आदेश पहुंचने से खलबली मची है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक तत्कालीन प्रधानाध्यापक रस्तौगी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। गेहूं घोटाले में कई अन्य स्कूलों के तत्कालीन प्रधानाध्यापकों और अधिकारियों पर भी तलवार लटकी है। इसके खिलाफ भी जल्द कार्यवाही और वसूली के कयास लगाए जा रहे हैं।
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- मामला 1998 का है। पुलिस लाइन स्कूल के तत्कालीन प्रधानाध्यापक के खिलाफ शासन से कार्यवाही और वसूली के आदेश हुए हैं। - अखिलेश सागर, जिला समन्वयक मिड डे मील
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