मुरादाबाद। पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों के खिलाफ हिंसक वारदात के बाद सुरक्षा के लिए मजबूत कानून की मांग के साथ प्राइवेट डॉक्टर सोमवार को हड़ताल पर चले गए। डॉक्टरों ने पूरे दिन आईएमए भवन में सभाएं की। दोपहर में हाथ और सिर पर प्रतीकात्मक तौर पर बैंडेज बांध और हेलमेट लगाकर जुलूस की शक्ल में कलक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा। डॉक्टरों की सुरक्षा के कानून बनाने में विलंब पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। शाम को कैंडल मार्च निकालकर डॉक्टरों ने विरोध जताया। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार के साथ सकारात्मक बातचीत के बाद सोमवार शाम करीब साढ़े सात बजे डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म करने का ऐलान किया है।
आईएमए अध्यक्ष डॉ. बीपीएस लोचब के मुताबिक सोमवार सुबह सभी डॉक्टर आईएमए भवन में इकट्ठा हुए। उनकी केंद्र सरकार से डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए मजबूत कानून बनाने की मांग थी। पश्चिम बंगाल में हिंसक भीड़ द्वारा दो जूनियर डॉक्टरों को पीटकर गंभीर रूप से घायल करने पर आक्रोशित डॉक्टरों ने दोपहर में जैन मंदिर पर इकट्ठा होकर कमिश्नर आवास के सामने से कलक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान डॉक्टरों के सिर पर हेलमेट, सिर और हाथ पर बैंडेज बांधकर प्रतीकात्मक रूप से असुरक्षा का संदेश दिया। डीएम राकेश कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपने के बाद डॉक्टरों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। शाम सात बजे डॉक्टरों ने आईएमए से कंपनी बाग तक कैंडल मार्च निकाला। आईएमए सेक्रेटरी डॉ. सीपी सिंह, डॉ. गिरजेश केन, डॉ. संगीता मदान, डॉ. पूनम सिंह, डॉ. स्मिता अग्रवाल, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. प्रदीप अग्रवाल, डॉ. शलभ, डॉ. तरुण अग्रवाल, डॉ. रजत समेत बड़ी संख्या में डॉक्टरों की मौजूदगी रही।