मुरादाबाद। तमाम भर्तियों के कोर्ट में केस दायर होने और परिणाम के इंतजार में युवा रोजगार की बाट जोह रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी शिक्षक भर्ती वाले अभ्यर्थियों को हो रही है। इसके बावजूद इस सत्र में प्रवेश के लिए सबसे अधिक भीड़ बीएड कोर्स में ही है। प्राचार्यों का कहना है कि पढ़ाई के बाद त्वरित रोजगार मिल जाता है। इसके अलावा उच्च शिक्षा तक में मौके हैं।
प्राचार्य हिंदू कालेज डॉ. केसी गुप्ता का कहना है कि इस बार बीएड प्रवेश परीक्षा में करीब साढ़े पांच लाख अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए हैं। इस बार विद्यार्थियों को मेरिट में आने के लिए परेशानी होगी। बेसिक शिक्षा की भर्तियों में प्रतिभाग करने की अनुमति के बाद बीएड के प्रति रुझान ज्यादा बढ़ा है। इसके अलावा आगामी सत्र से तीन वर्षीय पाठ्यक्रम होने की भी चर्चा है। इसलिए विद्यार्थी दो वर्ष में ही बीएड की पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं। उच्च शिक्षा में कुछ विषयों में साक्षात्कार के बाद कुछ लोग कोर्ट में पहुंच गए, जिसकी वजह से स्टे हो गया है। वाणिज्य में कोई नियुक्ति नहीं हुई है। आयोग के लचर रवैये की वजह से समस्या आ रही है। साक्षात्कार मानकों के आधार पर नहीं होते हैं और एक पक्ष कोर्ट चला जाता है। माध्यमिक चयन बोर्ड और उच्च सेवा चयन बोर्ड मिलकर एक आयोग होने की भी संभावनाएं हैं। प्राचार्य विज्डम एजूकेशन कालेज डॉ. वीके वत्स का कहना है कि परीक्षा नियंत्रक की गिरफ्तारी और फर्जीवाड़े की वजह से सरकारी भर्तियों का भविष्य संशय में हैं। कई परिणाम कोर्ट में हैं। अभ्यर्थी तुरंत रोजगार चाहता है। बीएड के बाद सरकारी और निजी नौकरी मिल जाती है। विज्ञान संकाय की तुलना में एमएड के बाद नेट उत्तीर्ण करना आसान है। इससे उच्च शिक्षा में भी मौके मिल जाएंगे। अभ्यर्थी नौकरी के साथ पीएचडी कर लेता है। इसलिए बीएड, डीएलएड की सभी सीटें फुल हैं।