मुरादाबाद। पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत 10 जून से टीबी रोगी खोज अभियान चलाया जाएगा। 175 टीमें गांव एवं वार्डों में 87500 घरों पर पहुंचकर साढ़े तीन लाख लोगों की स्क्रीनिंग करेंगी। टीबी के रोगी की पुष्टि होने पर 48 घंटे के भीतर उसका इलाज कराया जाएगा।
जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने शुक्रवार को जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। जिला कार्यक्रम समन्वयक डा. मो जावेद ने बताया के अभियान के लिए 35 सुपरवाइजर तैनात किए हैं। 20 बलगम जांच केंद्र स्थापित किए जाएंगेे। जिनमें 25 लैब टेक्नीशियन जांच कर रिपोर्ट देंगे। डा. जावेद ने बताया कि जिला कारागार, किशोर गृह और नारी निकेतन में भी टीबी के रोगी खोजे जाएंगे। उन्होंने बताया कि पांच सक्रिय क्षय रोग खोजी अभियान में 2216060 लाख व्यक्तियों की स्क्रीनिंग की गई है। इनमें 19396 लोगों की जांच की गई और 714 टीबी पाई गई।
हर साल बढ़ रहे टीबी मरीज
2017 में निजी अस्पतालों में 3694 और 2018 में 5549 टीबी के मरीजों ने इलाज हुआ है। इसी तरह सरकारी अस्पतालों में 2017 में 2335 और 2018 में 2765 मरीजों का इलाज कराया गया। 2018-2019 में स्क्रीनिंग अभियान में अब तक 714 टीबी के मरीज मिले हैं।
मलिन बस्तियों में संक्रमण फैलने से बढ़ रहे मरीज
क्षय रोग विशेषज्ञ डा. जावेद के मुताबिक टीबी का माइक्रो बैक्टीरिया हर इंसान के शरीर में होता है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होते ही बैक्टीरिया सक्रिय हो जाता है। मुरादाबाद में जनसंख्या घनत्व अधिक होने और दूषित पर्यावरण के चलते टीबी के मरीजों की संख्या अधिक है। मलिन और पीतल बस्तियों में एक संक्रमित व्यक्ति कइयों को बीमार कर रहा है। अभियान में सर्वाधिक मरीज इन्हीं इलाकों से चिह्नित होते हैं।
बाल और नाखून में नहीं होती टीबी
टीबी कई तरह की होती है। सर्वाधिक मरीज फेफड़े की टीबी से ग्रसित होते हैं। बाल और नाखून को छोड़कर शरीर में कहीं भी टीबी हो सकती है। तंबाकू, धूम्रपान और शराब पीने वालों में सामान्य लोगों की तुलना में टीबी होने की 10 फीसदी संभावना अधिक होती है।