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पढ़ाने से इनकार किया तो घर से छोड़कर भागी किशोरी

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चंदौसी। कक्षा सात तक किसी तरह पढ़ाई की लेकिन इसके बाद परिजनों ने किशोरी को पढ़ाने से इनकार कर दिया। काफी समय तक परिजनों से पढ़ाने की गुहार करती रही लेकिन जब वह नहीं माने तो रविवार को किशोरी पैदल ही घर से निकल गई। मझावली के निकट रेलवे ट्रैक के आसपास ग्रामीणों ने देखा तो शक होने पर उसे प्रधान के सुपुर्द कर दिया। प्रधान ने वूमेन पावर लाइन की जिला समन्वयक को सूचना दी। देर रात किशोरी को समझाबुझाकर परिजनों को सौंपा गया।
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लड़कियां भी पढ़ाई को लेकर काफी जागरूक हो रही हैं। वह खुद पढ़ना चाहती है, लेकिन कभी कभी परिवार के हालात व सुरक्षा का भय उनके हाथों से किताबें छीन लेता है। एक ऐसा ही मामला आज उस समय सामने आया, जब एक पंद्रह वर्षीय किशोरी को बहजोई थाना क्षेत्र के मझावली गांव के रेलवे ट्रैक के आसपास अकेला घूमते देखा गया। दोपहर को लोगों की नजर पड़ी तो अंजान लड़की को घूमते देख शक हुआ। उससे बात करके नाम पता पूछा तो उसने कुछ भी नहीं बताया। ग्रामीणों ने मझावली के प्रधान को सौंप दिया। प्रधान ने पुलिस से संपर्क साधा लेकिन कोई रिपांस नहीं मिला तो वूमेन पावर लाइन की जिला समन्वयक संगीता भार्गव से संपर्क साधा। संगीता भार्गव तत्काल ही मझावली गांव पहुंची और किशोरी को अपने घर ले आई। पहले तो किशोरी ने कुछ भी बताने से इनकार किया लेकिन घंटेभर की काउंसिंलिंग के बाद उसने अपना नाम पिंकी निवासी वीर सावरकरनगर चंदौसी बताया। उसने कहा कि वह सातवीं तक पढ़ी है, लेकिन अब परिजन उसे पढ़ाना नहीं चाहते हैं। जब उससे पूछा कि घर छोड़कर कहां जा रही थी तो उसने बताया कि यह मालूम नहीं कि कहां जाना था। किशोरी की मां को बुलाया तो उसने बताया कि किशोरी पढ़ाई के चक्कर में जहां तहां घूमती है, जमाना खराब है, कहीं कोई ऊंच नीच न हो जाए, इसलिए आगे पढ़ाने का मन नहीं है। इसी बीच किशोरी परिजनों से जान का खतरा भी बताने लगी। इस पर उसकी मां व भाई को भी सख्त हिदायत दी गई, किशोरी का नाम स्कूल में लिखाने को भी कहा गया। देर रात उसे मां व भाई के साथ भेज दिया गया।
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