आज के समय में कोई सुखी नहीं है। सुख वहां है जहां हम और आप अपनी इच्छाओं का दमन करते है। हमारा सुख हमारे संतोष करने में है। ये बातें कथा व्यास रामानुजाचार्य ने श्री रामकथा के अंतिम दिन व्यक्त किए।
अशोकनगर के देवरखेड़ा रोड स्थित सिंह कृषि फार्म पर हो रही श्रीराम कथा में कथा व्यास ने कहा कि जिस दिन हमारी सोच में यह आ जाएगा कि परमात्मा हमेें जितना दिया है, उतने में ही प्रसन्न हूं। जब तक यह बात सोच में नहीं आएगी हम दुखी रहेंगे। दूसरों को बुरा सोचेंगे तो हमारे साथ भी बुरा होगा। कर्म अच्छा हो अथवा बुरा फल उसी पर निर्भर करता है। मानव अपने जीवन में जो भी अच्छा बुरा पाता है। वो उसके कर्मों का ही फल है।
मनुष्य चाहे तो अपने कर्म बदलकर सुख प्राप्त कर सकता है। अगर हम विचार करें तो हमें कोई पराया हो ही नहीं सकता है। आज संसाधन अधिक बढ़ गए है, लेकिन विचार की दृष्टि से हम गरीब हो गए है। जिसके कारण हम सभी भौतिक सुखों के होते हुए भी गरीब हो गया। मन अशांत व जीवन तनाव से घिर गया है। तनाव मुक्त जीवन जीन केे सबसे बड़ा सूत्र है कि हम धर्मयुक्त जीवन जिएं। महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।
कथा में डा.आरपी सिंह, डा दीपक सिंह, शिव सिंह, आरती सिंह, नूतन चौधरी आदि मौजूद रहे। उधर रेलवे कालोनी के हनुमान मंदिर में हो रही श्रीमद्भागवत कथा में बाल योगी पचौरी महाराज ने कहा कि भागवत कथा ही वह माध्यम है जो जीव को आसानी से इस भवसागर से पार ले जाती है। कथा में उन्होंने कृष्ण जन्म का भावपूर्ण वर्णन किया। बधाइयां गाई गई और प्रसाद वितरण किया गया। ओमप्रकाश शर्मा, डीपी सिंह, श्यामलाल मीणा, रोहित श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।