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चरित्रहीन समाज का सबसे बड़ा प्रदूषण

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चंदौसी। चरित्र का पतन, सबसे बड़ा पतन है। चरित्रहीन व्यक्ति समाज का सबसे बड़ा प्रदूषण है। चरित्र के अभाव में मनुष्य समृद्ध व ज्ञानी होते हुए भी रावण की तरह हो जाता है। ये बातें रामानुजाचार्य महाराज ने कहीं।
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देवरखेड़ा रोड स्थित सिंह कृषि फार्म हाउस पर हो रही श्री रामकथा के आठवें दिन कथा व्यास ने कहा कि श्रीराम की अपेक्षा रावण के पास हर चीज की अधिकता थी। फिर भी रावण मारा गया, जिसका प्रमुख कारण रावण का चरित्रहीन होना था। समाज का चरित्र श्रेष्ठ नहीं होगा तो वह पतनशील हो जाएगा। वर्तमान में सत्य सर्वथा भिन्न है। आज चरित्र निर्माण कसे अधिक शरीर निर्माण पर ध्यान दिया जा रहा है। चरित्र कैसे अनुकरणीय बने, श्रेष्ठ बने इसकी किसी को चिंता नहीं है।
आपको श्रेष्ठ चरित्र का निर्माण करना है तो श्रीराम से बढ़कर किसी का चरित्र आदर्श नहीं हो सकता है। आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। कथा में आरपी सिंह, दीपक सिंह, एसपी सिंह, शिव सिंह, राहुल प्रताप सिंह, आरती सिंह आदि मौजूद रहे। उधर ग्राम अकरौली के काली मंदिर पर हो रही रामकथा के अंतिम दिन कथा व्यास ने शिवशंकर भारद्वाज ने कहा कि दशरथ जी के जीवन में सब कुछ होते हुए वह संतान न होने से ग्लानि का अनुभव करते थे।
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यज्ञ से खीर का प्रसाद प्राप्त करने पर चार पुत्र हुए। खीर में तीन वस्तुएं मिलती है। वैसे ही दूध ज्ञान, चावल कर्म और चीनी भक्ति के रुप में मिलते है तब ही प्रभु अवतरित होते है। रामजन्म पर बधाईयां गाई गई। समापर पर भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें तमाम श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान अखिलेश शास्त्री ,राजेंद्र प्रधान, हरिकृष्ण शर्मा, अखिलेश श्रीवास्तव, देशराज सिंह यादव, शिवनंदन आदि ने सहयोग किया।
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