चंदौसी। रासायनिक खादों व कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से जमीन की उर्वरा शक्ति तो कमजोर हो ही रही है, साथ ही इसका मानव स्वास्थ्य पर भी गलत प्रभाव पड़ रहा है। यही कारण है कि अब शासन का ध्यान जैविक फसलों के उत्पादन पर है। इसीलिए जैविक खेती पर जोर दिया जा रहा है। तीन वर्ष जैविक खेती करने वाले किसान की फसल का निरीक्षण लखनऊ की टीम करेगी। इसके बाद किसान को जैविक फसल का प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा।
किसान अधिक पैदावार लेने के लिए अंधाधुंध रासायनिक उर्वरक व कीटनाशक का प्रयोग कर रहा है जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति लगातार कमजोर हो रही है। इससे जमीन धीरे-धीरे बंजर होती जा रही है। इन फसलों से निकले खाद्यान्न भी आम आदमी के लिए नुकसान पहुंचा रहे है। निर्यात करने पर फसल की गुणवत्ता के आधार पर इसे फेल कर दिया जाता है। इससे निर्यात पर खासा प्रभाव पड़ रहा है। साथ फसल का अच्छा मूल्य भी नहीं मिल पाता है। इसलिए शासन ने अब जैविक खेती की पहल शुरू की है। इसके लिए शासन ने कवायद भी शुरू कर दी है, जिसमें किसान जैविक खेती करेगा, वह रासायनिक उर्वरक न लगाकर देशी खाद का प्रयोग करेगा। कीटनाशक के स्थान पर जैविक कीटनाशक का इस्तेमाल करेगा। जो भी किसान जैविक खेती करेगा उसकी खेती का निरीक्षण लखनऊ से टीम गांव पहुंचकर फसल का निरीक्षण करेगी। इस दौरान टीम यह देखेगी कि किसान ने खेती में रासायनिक उर्वरक अथवा कीटनाशक का प्रयोग तो नहीं किया है। इसके बाद ही वह फसल जैविक फसल मानी जाएगी। यह निश्चित होने के बाद बीज प्रमाणीकरण संस्था किसान को फसल का जैविक होने का प्रमाण पत्र प्रदान करेगी।
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किसान को जैविक खेती कराने के लिए शासन की मंशा यह है कि लोगों को शुद्ध खाद्यान्न मिल सके और जमीन को भी बंजर होने से बचाया जा सका। इसके लिए जनपद स्तर पर भी कवायद शुरू कर दी गई है।
भूषण कुमार, उपनिदेशक बीज प्रमाणीकरण संस्था, मुरादाबाद