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चाणक्य जैसा कूट नीतिज्ञ दुनिया में दूसरा नहीं हुआ

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चंदौसी। महापुरुष स्मारक समिति के तत्वावधान में महान अर्थशास्त्री और कूटनीति के प्रणेता चाणक्य की जयंती मनाई गई। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि उनके जैसी नीतिवान प्रतिभा दुनिया में किसी और में नहीं पाई गई।
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हनुमान मंदिर में देवेंद्र प्रसाद शर्मा की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कवि माधव मिश्र ने कहा कि महान चाणक्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के गुरु थे। उन्हें विष्णु गुप्त, कौटिल्य, चाणक्य आदि नामों से जाना जाता है। उनके कार्यों और नीति की चर्चा धर्म ग्रंथों में भी मिलती है। उनके द्वारा लिखा गया अर्थशास्त्र ग्रंथ, राजनीति, अर्थनीति, कृषि, समाजनीति का समावेश है। उन्होंने दुनियां को कूटनीति के सिद्धांत दिए जो आज भी अकाट्य हैं। चाणक्य ने कहा था कि पहले पांच साल बच्चे को दुलार के साथ पालना चाहिए। अगले पांच साल डांट फटकार के साथ निगरानी में रखना चाहिए लेकिन जब वह सोलह साल का हो जाए तो उसके साथ दोस्त जैसा व्यवहार रखना चाहिए।
इस अवसर पर संयोजक पंडित सुरेशचंद्र शर्मा, योगेश शर्मा, प्रमोद कुमार गुप्ता ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर निशु चौहान, रीता अग्रवाल, विजय प्रकाश गौड़, प्रीति अग्रवाल, पुनीत कुमार, अमित कुमार शर्मा, मंजू वार्ष्णेय, दिनेश गुप्ता, धर्मदेव शर्मा, बाल किशन गुप्ता, सत्यपाल सिंह, एन के सक्सेना, अशोक शर्मा, मनोज शर्मा, पवित्र शर्मा आदि शामिल रहे। संचालन बृजेंद्र प्रसाद तिवारी ने किया।
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