मिलक। हड़ताल पर अड़े निलंबित लेखपाल संघ के अध्यक्ष और मंत्री पर एस्मा का उल्लंघन पर केस दर्ज होने पर और नोटिस जारी होने पर हड़ताली लेखपाल काम पर नहीं लौटे हैं। इससे प्रशासनिक कार्रवाई कागजी होकर रह गई है।
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ की स्थानीय इकाई के अध्यक्ष राजीव सक्सेना और मंत्री सुमित सक्सेना अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर तीन जुलाई से अपने 42 साथियों के साथ हड़ताल पर अड़े हुए थे। सरकार ने लेखपालों की हड़ताल को तीन जुलाई को छह माह के लिए एस्मा लगाकर प्रतिबंधित कर दिया था। हड़ताली लेखपालों की ओर से एस्मा का उल्लंघन करने पर लेखपाल संघ की स्थानीय इकाई के अध्यक्ष राजीव कुमार सक्सेना और संघ के मंत्री सुमित कुमार सक्सेना को पांच जुलाई को निलंबित कर दिया था तथा हड़ताल में शामिल 42 अन्य साथी लेखपालों को नोटिस जारी किए थे। उन्होने निलंबित और हड़ताली लेखपालों के बस्ते जमा कराने के आदेश दिए थे ,लेकिन किसी के बस्ते जमा नहीं हो पाए। प्रशासन की सख्ती करने पर कोई लेखपाल काम पर नहीं लौटा था। जिसमें से 29 प्रशिक्षणार्थी लेखपालों को सेवा समाप्ति को नोटिस जारी किए थे जिसकी सीमा 12 जुलाई को खत्म हो चुकी है ,लेकिन कोई प्रशिक्षणार्थी हड़ताल से वापस नहीं लौटा। प्रशासन की ओर से निलंबित संघ के अध्यक्ष राजीव सक्सेना और मंत्री सुमित सक्सेना के 13 जुलाई को एस्मा का उल्लंघन करने,अनाधिकृत रूप से सरकारी रिकार्ड कब्जे में करने और एस्मा का उल्लंघन करने के लिए लेखपालों को उकसाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। रिपोर्ट दर्ज होने पर संघ के पूर्व मंत्री ओमकार सिंह शनिवार को काम पर लौट आए,लेकिन अभी 43 लेखपाल हड़ताल पर अड़े हुए हैं।