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प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद ग्यारवें दिन खुला डाकघर

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चंदौसी। क्षेत्रीय रेलवे प्रशिक्षण संस्थान के भवन में चल रहा डाकघर उपजिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद ग्यारहवें दिन खुल गया। डाकघर खुलने से डाक कर्मियों व उपभोक्ताओं ने राहत की सांस ली।
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रेलवे के क्षेत्रीय रेलवे प्रशिक्षण संस्थान के भवन में काफी समय से डाकघर संचालित है। किराए के विवाद को लेकर रेलवे ने 13 अप्रैल को डाकघर पर ताले डालकर उसे सील कर दिया था। दोनों विभागों के अधिकारियों के मध्य वार्ता होने के बाद भी डाकघर नहीं खुल सका। डाक सहायक विचित्र गुप्ता इस बाबत जिलाधिकारी आनंद कुमार से मिले और सारी जानकारी देकर डाकघर खुलवाने की मांग की।

जिलाधिकारी ने इस बारे में उपजिलाधिकारी ओमवीर सिंह को निर्देशित किया। उपजिलाधिकारी शुक्रवार को डाकघर पहुंचे और रेलवे के अधिकारियों से बातकर सारी जानकारी ली। इस दौरान उन्होने रेलवे के अधिकारियों के प्रति कड़ी नाराजगी जताते हुए कहाकि बिना किसी मजिस्ट्रेट के उन्होंने डाकघर को कैसे बंद करा दिया। अगर किराये को लेकर विवाद था तो उन्हें अवगत क्यों नहीं कराया गया। डाकघर पर ताले डालने का अधिकार किसने दे दिया।
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अगर ताले लगाने ही है तो न्यायालय की शरण ले। कुछ समय बाद शाम पांच बजे रेलवे के अधिकारी सहायक मंडल अभियंता दिनेश कुमार सिंह ने पोस्टमास्टर भगवान सिंह, जीआरपी व आरपीएफ की मौजूदगी में डाकघर के ताले खोल दिए। इस दौरान दिनेश सिंह की पोस्टमास्टर से हस्ताक्षर कराने को लेकर काफी नोकझोक हुई। पोस्ट मास्टर का कहना था कि जब ताले डालते समय उनके हस्ताक्षर नहीं कराए गए तो अब क्यों कराए जा रहे है। लेकिन दबाव के चलते पोस्टमास्टर को हस्ताक्षर करने पड़े।

अगर कोई विवाद है तो न्यायालय की शरण ले जाती। ताला डालने व सील लगाने का अधिकार उन्हें नहीं है। कार्रवाई की चेतावनी देकर व समझा बुझाकर डाकघर के ताले खुलवा दिए है।
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- ओमवीर सिंह उपजिलाधिकारी चंदौसी।
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