आगामी परीक्षाओं और लोकसभा चुनाव के मद्देनजर स्कूलों में शिक्षक मनमर्जी से अवकाश नहीं ले पाएंगे। अवकाश आवेदन के लिए शिक्षकों को कागजी औपचारिकताएं पूरी करनी होगी। बाल्य देखभाल अवकाश भी स्कूलों में छात्र एवं अध्यापक संख्या से तय होगा। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को इसके आदेश जारी कर दिए हैं।
सरकारी स्कूलों में शिक्षक मनमर्जी से अवकाश पर रहते हैं। कई शिक्षक अवकाश स्वीकृत भी नहीं कराते हैं। जबकि कई मामले में अवकाश स्वीकृत कराने के बाद सेवा पंजिका में दर्ज नहीं कराते हैं। देहात क्षेत्र के स्कूलों में बीएसए की छापामारी में ऐसे कई मामले पकड़े भी जा चुके हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी योगेंद्र कुमार ने परीक्षा एवं लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अवकाश को लेकर खंड शिक्षा अधिकारियों को सर्कुलर जारी किया है। बीएसए ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारियों के स्तर से शिक्षिकाओं के अपूर्ण प्रपत्रों एवं कवरिंग लेटर के बिना बाल्य देखभाल अवकाश की फाइलें भेजी जाती हैं, जो कि खेदजनक है।
बीएसए ने जिलाधिकारी के मौखिक निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि विषम परिस्थितियों में ही शिक्षकों को अवकाश स्वीकृत किए जाएंगे। उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारियों से कहा कि स्कूलों में छात्र एवं अध्यापक संख्या को दृष्टिगत रखते हुए बाल्य देखभाल अवकाश की फाइलें उनके कार्यालय भेजी जाएं। इसके लिए आवेदक के संपूर्ण प्रपत्र (सेवा पंजिका समेत) खंड शिक्षा अधिकारी का कवरिंग लेटर की अनिवार्यता होगी। बीएसए के इस आदेश से शिक्षकों में खलबली मची है।