महानगर के नालों से होकर निकल रही सभी पेयजल लाइनों की जांच की जाएगी। डीएम ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। जांच टीम में जलकल और जल निगम के अधिकारियों को शामिल किया गया है।
पानी आपूर्ति की पाइप लाइन नालों और सीवरों के बराबर में नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद महानगर में अधिकतर स्थानों पर पानी की लाइन नालों के बराबर में हैं। कई जगह तो नालों के बीच से होकर पानी की लाइन निकाली गई हैं। इनके लीकेज होने पर पानी में नालों की गंदगी मिलने की आशंका रहती है। डीएम राकेश कुमार सिंह ने बताया कि नालों के बराबर से और नालों में से होकर निकल रही सभी पेयजल लाइनों की जांच कराई जाएगी। जांच की अध्यक्षता एसीएम प्रथम विनीता सिंह करेंगी। टीम में जलकल विभाग के जीएम और जल निगम के एक्सईएन शामिल होंगे।
डीएम ने नालों में कुरबानी के पशुओं का खून बहने की भी जांच के आदेश दिए हैं। जांच के बाद टीम अमान्य स्थानों पर कुर्बानी करने और नालों में खुन बहाने के मामलों के आरोपियों को चिंहित करेगी। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की जांच की हुई आलोचना -
नगर निगम , जलकल विभाग और प्रशासन के अफसरों ने जांच में पाया कि पानी में खून निकल रहा है। यह खून घरों तक पहुंच रहा है। नालों में भी खून बह रहा है। जलकल विभाग ने टीम ने नाले के बराबर में पाइपलाइन की लीकेज का भी पता लगा दिया। उसकी मरम्मत भी कराई गई। उसके बावजूद पुलिस ने पानी में खून मिलने के मामले को सिरे से नकार दिया। इंस्पेक्टर कटघर की ओर से डाले गए एक ट्वीट में कहा गया है कि फायर ब्रिगेड की टीम से जांच कराई गई थी। उसमें पानी में खून मिला नहीं पाया गया। दरअसर अवैध कटान रोकने और नालों में खून मिलने को रोकने की जिम्मेदारी पुलिस की थी। इससे बचने को पूरे मामले को ही सिरे से नकार दिया गया।