प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी जनधन योजना के प्रति अब लोगों का रुझान कम होता जा रहा है। शुरुआत में 15-15 लाख रुपये सरकार की ओर से बैंक खातों में जमा होने की उम्मीद में लोगों ने यह खाते खुलवा लिए थे। करीब पौने साल बाद भी एक धेला इन खातों में सरकार की ओर से जमा नहीं हुआ तो इन खातेदारों ने अपने खातों में एक भी रुपया जमा नहीं किया। इन हालातों में बैंक प्रबंधकों के सामने एक ही विकल्प है कि वह खातेदारों से न्यूनतम राशि जमा कराएं या फिर इन खातों को बंद करने से पहले नोटिस जारी करें।
प्रधानमंत्री मोदी ने देश के हर नागरिक के पास अपना खाता होने पर काफी जोर दिया था। उनकी इस मंशा को पूरा करने के लिए बैंकों ने अभियान चलाकर 4.76 लाख खाते खुलवाए थे। चलाई। शुरुआत में इन जनधन खातों को खोलने में लोगों ने काफी दिलचस्पी दिखाई। अब यह खाते सिर्फ आंकड़ों तक ही सिमट कर रह गए हैं। 21 महीने से लेनदेन न होने की वजह से 93004 खाते निष्क्रिय हो गए। बैंक अधिकारियों की मानें तो इन खातों में अति शीघ्र लेनदेन होना बहुत जरूरी है।
बीमा का कर कर रहे प्रचार
किसी भी तरह इन खातों में जमा धनराशि दिखाई जाए। इसके लिए बैंक अधिकारी प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में 330 रुपये में दो लाख और जीवन सुरक्षा बीमा योजना में 12 रुपये में भी दो लाख का बीमा का लाभ बताकर कुछ रुपये जमा करने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं।
नए खाते खुलवाने का आदेश
बैंकों को एक बार फिर लोगों के नए जनधनखाते खोलने का अभियान चलाने का आदेश मिला है। इसके अंतर्गत जो युवा 18 साल के हैं और उनके बैंक खाते नहीं खुले हैं, उन सभी को जनधन खातों से जोड़ा जाएगा। बैंक अधिकारी जगह-जगह शिविर लगाकर लोगों को खाते खोलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, लेकिन दिलचस्पी न होने की वजह से यह काफी मुश्किल हो रहा है।
वर्जन...
नोटबंदी के समय का पुराना विवरण अभी मौजूद नहीं है। सबसे ज्यादा खाते प्रथमा बैंक के हैं। सभी बैंक के 93 हजार जन धन खाताधारकों को नोटिस जारी किए गए हैं, ताकि इनमें लेनदेन होने से यह सक्रिय हो सकें। हम युवाओं, महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को खाता खोलने को कह रहे हैं।
महेश प्रसाद, अग्रणी बैंक प्रबंधक