एक कमरे में 6-6 स्टूडेंट्स.. बहुत नाइंसाफी है
क्रासर
बनवटागंज और लाजपतनगर हॉस्टल में नारकीय जीवन जीने को मजबूर छात्र
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। दीवारों पर लटकते बिजली के नंगे तार... टायलेट में दरवाजा नहीं.. एक-एक कमरे में 6-6 छात्र। ऐसी ही हालत में रहने को मजबूर हैं बनवटागंज और लाजपतनगर हॉस्टल के स्टूडेंट्स। महानगर में एससी वर्ग के छात्रों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए तीस से पैंतीस साल पहले छात्रावास खोले गए थे। लेकिन अब इन छात्रावासों की स्थिति देखकर कहा जा सकता है कि यहां छात्र नारकीय जीवन जी रहे हैं। यह छात्रावास समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित किए जा रहे हैं।
इन छात्रों के लिए दो छात्रावास समाज कल्याण विभाग के परिसर में एक बनवटा गंट और एक लाजपत नगर में हैं। बनवटा गंज स्थिति बापू छात्रावास और लाजपत नगर स्थिति अंबेडकर छात्रावास तो नारकीय स्थिति में हैं ही। परिसर के अंदर बने छात्रावासों में भी कोई सुविधा नहीं है। यहां छात्र कबसे रह रहे हैं, छात्रावास की देखरेख कौन करता है, मेंटिनेंस की जिम्मेदारी किसकी है इन सवालों के सही -सही जवाब खुद समाज कल्याण अधिकारी के पास भी नहीं है। इन छात्रावासों के छोटे-छोटे कमरों में एक साथ चार से पांच-पांच छात्र रहने को मजबूर हैं। कुछ छात्रों की पढ़ाई सालों पहले खत्म हो गई है बावजूद वह छात्रावास में रह रहे हैं। नियमानुसार छात्रों का प्रतिवर्ष रिन्यूवल होना था लेकिन ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही है। किसी भी छात्रावास में वार्डन की व्यवस्था नहीं है। नाम मात्र के लिए एक छात्रावास अधीक्षक की नियुक्ति कर दी गई है जो वर्षों से बनवटा और लाजपत नगर के छात्रावास में नहीं गए हैं। विभागीय लापरवाही से जहां छात्रों को भारी असुविधाओं में रहना पड़ रहा है वहीं उन छात्रों का हक भी छीना जा रहा है जिन्हें यहां रहते हुए पढ़ाई करनी थी। लेकिन कुछ छात्रों ने इस पर कब्जा कर लिया है।
लाजपत नगर हॉस्टल : दस कमरों में 60 स्टूडेंट्स
लाजपत नगर के अंबेडकर छात्रावास में करीब दस छोटे-छोटे कमरे हैं। इन कमरों में करीब 60 छात्र रहते हैं। तीन छात्रों के लिए तीन खस्ताहाल टायलेट हैं। टायलेट के गेट टूटे हैं। बाथरूम की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां की पूरी बिल्डिंग जर्जर हालत में है। दीवारों में बड़ी- बड़ी दरारें पड़ी हैं। सालों से यहां मेंटिनेंश का काम नहीं हुआ है। भवन कभी भी गिर सकता है। बरसात में छात्रावास में छुटने भर पानी भर जाता है और ग्राउंट फ्लोर के कमरों में भी पानी भरा रहता है। पांच सालों से यहां का हैंडपंप खराब है। विभाग ने इसे बनाने की अभी तक जहमत नहीं उठाई है। छात्र नगर निगम का कनेक्शन वाला पानी पीते हैं लेकिन टैंक की सफाई नहीं होने से पानी में कीड़े आते हैं।
बनवटा गंज हॉस्टल : दीवारों पर लटक रहे बिजली के नंगे तार
बनवटा गंज स्थित बापू छात्रावास की स्थिति सबसे अधिक दयनीय है। यहां छात्रों के जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां बिजली के तार वर्षों से नहीं बदले गए। अब तारों से प्लास्टिक की पर्त हट गई है। कमरों में बिजली की नंगी तारें लटक रही हैं। छात्र दीवार छूने से भी डरते हैं। छात्रों ने बताया कि बरसात में दीवारों को छूने में भी करंट आता है। यहां 10 कमरों में तीस से पैंतीस छात्र रहते हैं। इन छात्रों के लिए दो टायलेट हैं, लेकिन इस्तेमाल करने लायक एक ही है। दूसरा पूरी तहत जर्जर हो चुका है। जिस टायलेट का यूज होता है उसमें भी गेट नहीं है। बाथरूम की भी कोई व्यवस्था नहीं है।
न वार्डन न सफाई कर्मचारी की है व्यवस्था
इन दो छात्रावासों में न तो कोई वार्डन है और न ही कोई सफाई कर्मचारी है। छात्र अपने स्तर से ही थोड़ी बहुत सफाई करते हैं। लेकिन यहां गंदगी पसरी रहती है। गंदगी, जर्जर भवन, कबाड़ आदि की स्थिति देखकर कहा जा सकता है कि विभाग के अधिकारियों ने सालों से इन छात्रावासों का निरीक्षण नहीं किया है। वहीं समाज कल्याण विभाग के परिसर में बने दो छात्रावासों में भी साफ सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। परिसर के दोनों छात्रावासों में करीब 38 कमरे हैं। इन कमरों में करीब 180 छात्र रहते हैं। इन छात्रों पर दस टायलेट हैं लेकिन सब खस्ताहाल हैं। नियमानुसार यहां मेस की व्यवस्था, छात्रों को चारपाई, टेबिल, कुर्सी, पंखा, जैसी सुविधाओं की जिम्मेदारी विभाग की है लेकिन इन सब की व्यवस्था छात्रों ने अपने स्तर से की है।
वर्जन
विभाग के परिसर में बने छात्रावास ठीक हैं। छात्रों को सभी सुविधाएं दी जा रही हैं। बाकी जो दो छात्रावास हैं वो किराए पर हैं। लाजपत नगर वाला छात्रावास खाली होना है क्योंकि हम केस हार गए हैं। बनवटा वाले छात्रावास के लिए मेंटिनेंश का पैसा तीन सालों से नहीं आया है। सभी छात्रावास को मैं ही देखता हूं।
----सुधीर कुमार, छात्रावास अधीक्षक
वर्जन
जर्जर छात्रावासों के छात्रों को परिसर के छात्रावास में शिफ्ट किया जाएगा। छात्रों को जो भी समस्या है उनका समाधान भी शीघ्र कर दिया जाएगा।
- ए के सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी