80 फीसदी शैक्षिक सत्र बीतने के बाद एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय को शिक्षा व्यवस्था बेहतर करने की याद आई है। उसने कालेजों को माहवार कार्यक्रम बनाकर चरणबद्ध तरीके से पाठ्यक्रम पूरा कर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। कालेजों का कहना है कि विवि का यह आदेश सिर्फ कागजी कार्यवाही तक सीमित रह जाएगा। इसकी सत्यता परखने के लिए अब समय नहीं बचा है।
एक अगस्त से विश्वविद्यालय से संबद्ध कालेजों में कक्षाओं का संचालन शुरू हो जाता है। लगभग 70 फीसदी कालेजों में वर्ष भर नियमित कक्षाएं नहीं लगती हैं। शिक्षक और विद्यार्थी एक-दूसरे पर कक्षाओं में न आने का आरोप लगाते रहते हैं और कालेज प्रशासन विद्यार्थियों को आने के लिए संदेश भेजने और पोस्टकार्ड भेजकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। एक दिसंबर को विश्वविद्यालय द्वारा भेजे गए पाठ्यक्रम संबंधी निर्देश से खलबली मची हुई है। मेफेयर कालेज के प्राचार्य डॉ. छुट्टन खान ने बताया कि पाठ्यक्रम की कार्ययोजना 15 अगस्त तक मांग लेनी चाहिए थी, ताकि 184 दिन की पढ़ाई को यूनिट के हिसाब से बांट दिया जाता। शासन पर यह रिपोर्ट पहुंचने के बाद कोई भी अधिकारी औचक निरीक्षण कर कार्ययोजना के क्रियान्वयन की सत्यता परख सकता था। 80 फीसदी सत्र बीतने के बाद इसका धरातल से कोई लेना-देना नहीं है। सिर्फ कागजी कार्यवाही तक सीमित है। गोकुलदास हिंदू गर्ल्स कालेज की प्राचार्य डॉ. अंजना दास ने बताया कि सत्र की शुुरुआत में कार्ययोजना भेजने से हमें भी अपने आंकलन के लिए वक्त मिल जाता। अब तो जो पाठ्यक्रम पूरा हो गया है, उसको ही भेज देंगे। इसकी सत्यता की जांच नहीं की जा सकती है।