ग्रामीण क्षेत्र में युवाओं को खेलकूद की सुविधाएं न दिलाने की वजह से वह शहरी क्षेत्र की ओर पलायन कर रहे हैं। गांवों के इन युवाओं को खेल के प्रति प्रोत्साहित कराने की जिम्मेदारी युवा कल्याण विभाग की है लेकिन इसकी ओर से एक साल के दौरान प्रयास ही नहीं हुए हैं। सरकार के आदेश हैं कि वर्ष में कम से कम तीन बार ब्लाक और जिला स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित करने के नियम हैं। जिससे कि अच्छे खिलाड़ियों का चयन कर उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा सके। लेकिन पिछले वित्तीय वर्ष में विभाग की उदासीनता की वजह से पांच लाख के स्थान पर 40 हजार रुपये ही मिले हैं। इस राशि से जिला स्तर पर एक ही प्रतियोगिता कराकर औपचारिकताएं पूरी क़र ली गईं।
ब्लॉक पर नहीं तैनाती
प्रत्येक ब्लॉक पर खिलाड़ियों को तैयार करने और प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए एक ब्लाक अधिकारी की नियुक्ति की जाती है, लेकिन मुरादाबाद के आठ में सिर्फ एक ब्लॉक पर ही तैनाती है। साथ ही ठाकुरद्वारा के गोपीवाला में आठ करोड़ की लागत और मूंढापांडे में सात करोड़ चार लाख की लागत से बनने वाले स्टेडियम का प्रस्ताव पड़ा हुआ है।
आठवीं क्लास से बैडमिंटन खेल रही हूं। चार बार प्रदेश स्तर पर खेल चुकी हूं, लेकिन कस्बे में अभ्यास की सुविधा न होने की वजह से आठ अगस्त से मौसी के घर रहकर स्टेडियम में तैयारी कर रही हूं।
शीतल राजपूत, हसनपुर, अमरोहा।
कक्षा सात से एथलेटिक्स प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर रही हूं। सात बार प्रदेश स्तर पर और एक बार राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हूं। गांव में सुविधाएं नहीं थीं। आने-जाने में परेशानी हो रही थी तो पांच वर्ष से बहन के घर रह रही हूं।
हितीक्षा कटारिया, लदावली।
पापा किसान हैं। सुबह चार बजे दौड़ने जाने में परेशानी होती थी। अब किराए पर कमरा लेकर रह रही हूं। प्रति माह छह हजार रुपये का खर्च आ जाता है।
रूबी, सेहल।
दो बार प्रदेश स्तर पर खेली हूं। यहां दो साल से किराए पर रहकर स्टेडियम में अभ्यास करती हूं। गांव में युवा कल्याण विभाग से कभी अधिकारी नहीं आए।
मंजू चौधरी, टांडा बादली, रामपुर।
भारत सरकार ने युवा नीति लागू कर दी है। अब जल्द ही ग्रामीण खिलाड़ियों को सुविधाएं दी जाएंगी। शासन स्तर से धनराशि प्राप्त होते ही विधिवत प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
नरेश चौहान, जिला युवा कल्याण अधिकारी।