कार्तिक शुल्क पक्ष की एकादशी को देवोत्थान पर देवताओं को जगाया गया। घरों में खिचड़ी, पुए बनाए गए। सिंघाड़ा, शकरकंद और गन्ने से परंपरागत तरीके से देवों की पूजा की गई। मंदिरों में भी देवोत्थान पर शालिग्राम व तुलसी जी का विवाह धूमधाम से हुआ। इसके अलावा लगभग सभी बैंक्वेट हाल में शहनाईयां गूंजीं।
देवोत्थान एकादशी पर चार माह के शयन के बाद भगवान श्रीहरि जागते हैं। इसके बाद से शुभ कार्यों का शुभारंभ होता है। सोमवार सुबह से ही मंदिरों में घंटे, घड़ियाल और शंखनाद के साथ भगवान को जगाया गया। महिलाओं ने एकादशी का व्रत रखकर दान भी किया। शाम के समय घरों के आंगन में देवताओं की कलाकृतियां बनाकर देवी-देवताओं का आह्वान कर उन्हें जागृत किया गया। महिलाओं ने गन्ना, सिंघाड़ा और शकरकंद को थाली में सजाकर देवों की पूजा की। दीपोत्सव पर घरों में प्रकाश के लिए लगाए गए दीपों को फिर जगमग कर आरती की गई।
कोर्ट रोड स्थित दुर्गा मंदिर से कार्तिक मास के तहत तुलसी-शालिग्राम का विवाह धूमधाम से हुआ। तुलसी-शालिग्राम की बारात निकाली गई। प्रधान पुजारी पातीराम सिमल्टी और भास्करानंद ने विधि-विधान से बारात को रवाना किया। बारात मंदिर से शुरू होकर गुरहट्टी चौराहा, बाजार गंज, टाउनहाल, गुलजारीमल धर्मशाला, ताड़ीखाना होते हुए मंदिर पर पहुंची। जगह-जगह स्वागत में पुष्प वर्षा हुई। मंदिर में बारात पहुंचने पर स्वागत किया गया। शाम को तुलसी-शालिग्राम जी के फेरे हुए। इसके बाद हलुआ आदि का भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान सुमन गुप्ता, निशा अग्रवाल, शारदा यादव, अंजू यादव, सुमन आहूजा आदि रहीं।
देवोत्थान विवाह के लिए भी शुभ मुहूर्त है। इस दिन सहालग शुरू हो जाता है। विवाह का शुभ मुहूर्त नहीं निकलने पर देवोत्थान एकादशी पर विवाह हो जाते हैं। विगत चार माह से शादियों पर लगा विराम एक बार फिर शहनाईयों की गूंज के साथ धूम धड़ाके में बदल गया। जिससे बैंक्वेट हाल शादियों से गुलजार रहे। विवाह स्थलों पर सुबह से ही लोगों की आवाजाही बनी रही। शाम को बैंडबाजों के साथ शहनाई और डीजे की धुनें सुनाई देने लगीं। बड़ी संख्या में बारात निकलने की वजह से सड़कों पर जाम की स्थिति बन गई।