किसानों को गन्ना बकाया मिलने की फिलहाल उम्मीद कम ही है। शासन के साफ्ट लोन के लिए 22 में से दस मिलों के आवेदन ही स्वीकार हुए हैं। अब इनको गन्ना विभाग के अफसरों की स्वीकृति के बाद लखनऊ भेजा जाएगा। कर्ज के लिए आवेदन न करने वाली मिलों के प्रबंधन का तर्क है कि किसानों के भुगतान के बराबर चीनी गोदामों में है। ऐसे में कर्ज लेकर बेवजह बैंकों को ब्याज क्यों दें? सरकार को चीनी की खुली बिक्री की अनुमति प्रदान कर देनी चाहिए।
मंडल की मिलों पर अभी 12 अरब का गन्ना भुगतान बकाया है। प्रशासन ने चीनी पर नियंत्रण किया हुआ है। हर महीने निर्धारित से ज्यादा चीनी नहीं बेची जा सकती है। किसानों का बकाया भुगतान करने के लिए शासन से साफ्ट लोन दिया जा रहा है। मंडल में तीन कोआपरेटिव चीनी मिल हैं, उनको लोन लेना नहीं है।
उनके अलावा धामपुर, स्योहारा, बहादरपुर, बरकातपुर, बुंदकी, चंदनपुर, रानीनंगला, असमौली, राजपुरा और मिलक नरायनपुर मिलों ने अभी तक कर्ज के आवेदन किए हैं। इनके आवेदन स्वीकार हो चुके हैं। उसके बावजूद कर्ज मिलने की औपचारिकता पूरी होने में अभी वक्त लगेगा। जबकि अन्य मिलों के किसानों का भुगतान निर्धारित 30 नवंबर तक होने पर संशय है।
गन्ना उपायुक्त राजेश मिश्रा का कहना है कि कोआपरेटिव मिलों का भुगतान शासन से सीधे कर दिया जाएगा। कर्ज स्वीकृत वाली मिलों का प्रस्ताव जल्द से जल्द शासन को भेजा रहा है। हमारा प्रयास है कि निर्धारित तारीख तक हर हाल में बकाया भुगतान करा दिया जाए। चीनी बिक्री खुली करने पर मूल्य फिर से गिर जाएंगे। भाकियू के जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह रंधावा का कहना है कि हमको 30 नवंबर तक समस्त बकाया चाहिए। किस तरह होता है, यह अफसर जानें।
वहीं अगवानपुर चीनी मिल के महाप्रबंधक चौधरी गजेंद्र सिंह का कहना है कि हमारे स्टाक में बकाया भुगतान के बराबर चीनी रखी हुई है। सरकार को हमें चीनी बिक्री की अनुमति देनी चाहिए। हम कर्ज लेकर उस पर ब्याज क्यों दें? चीनी के दाम भी गिर रहे हैं। किसान हित में चीनी की तत्काल बिक्री कराने की जरूरत है।