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पैसेंजर ट्रेनों से बदतर है स्पेशल ट्रेनें

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पैसेंजर ट्रेनों से भी बदतर है स्पेशल ट्रेनों की स्पीड
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घाटे का सौदा है रेलवे की स्पेशल ट्रेनें
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। कहने को तो ये स्पेशल गाड़ियां हैं, लेकिन इनकी चाल और परिचालन पैसेंजर ट्रेनों से भी बदतर है। त्योहारों पर घर जाने और त्योहार मनाकर वापस लौटने वाले मुसाफिरों को राहत देने के लिए रेलवे ने स्पेशल गाड़ियों का संचालन किया था लेकिन अप और डाउन दोनों ही तरफ से ये गाड़ियां यात्रियों को कोई राहत मिली।
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स्पेशल गाड़ियां के भरोसे रहने वाले यात्रियों को 28-18 घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। इनकी स्पीड पैसेंजर ट्रेन भी खराब है जिससे स्पेशल ट्रेनें अगले दिन ट्रेनें पहुंच रही हैं। जय नगर से नई दिल्ली के बीच चलाई गई स्पेशल ट्रेन मंगलवार को 28 घंटे देरी से जंक्शन पहुंची। इस ट्रेन को सोमवार दोपहर दस बजे जंक्शन पहुंचना था, लेकिन मंगलवार को शाम पहुंची। कटिहार जालंधर स्पेशल ट्रेन मंगलवार को 15 घंटे देरी से आई। दरभंगा से नई दिल्ली स्पेशल ट्रेन 19, कटिहार से आनंद विहार स्पेशल ट्रेन 18 घंटे देरी से जंक्शन पहुंची। गरीब रथ छह घंटे, मालदा टाउन हरिद्वार सात घंटे, शहीद एक्सप्रेस बारह घंटे और हावड़ा से हरिद्वार के बीच चलने वाली कुंभ साढ़े पांच घंटे देरी से जंक्शन से गुजरीं। ट्रेनों की लेट लतीफी से यात्री बेहाल हैं। यात्रियों का कहना है कि स्पेशल ट्रेन का किराया भी ज्यादा है और समय का कुछ भी पता नहीं है। हालांकि इन ट्रेनों में रिजर्वेशन कैंसल होने से रेलवे को लाखों रुपये का नुकसान होता है।
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