शासन के वृहद पौध रोपण अभियान के बाद अब अफसरों से मौके का सत्यापन कर भेजने को कहा गया है। शासन का प्रयास है कि मानक से ज्यादा पौध सूखने न पाएं। इसके चलते रविवार को दिनभर अफसरों की टीम पौध की स्थिति देखकर विडियो तैयार करती रहीं। मुरझा गए पौधों की सिंचाई को टैंकरों की संख्या बढ़ाई गई है।
हर साल कई लाख पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर सूख जाते हैं। वन विभाग के मानकों के अनुसार अधिकतम 30 फीसदी पौध ही सूख सकती है। हर हाल में 70 फीसदी पौध को बचाया जाना चाहिए। जबकि हालात इसके उलट हैं। सूखे और लापरवाही के चलते मात्र 20 फीसदी पौध ही बच पाते हैं। इसके चलते शासन ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। 15 अगस्त को जिले में नौ लाख पौध लगाई गई थी। रविवार को इनकी वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट शासन से मांगी गई। नगर निगम के चीफ इंजीनियर सुनील केसरी ने सभी जेई और सुपरवाइजर को पौध का सत्यापन करने भेजा। प्रत्येक वार्ड में पांच-पांच लोकेशन का निरीक्षण करके पौधों की वीडियो तैयार कर वन विभाग के कंट्रोल रूम को भेजी गईं। बारिश न होने से कई जगह की पौध सूखने लगी हैं। इसके लिए निगम से सिंचाई को टैंकरों की संख्या दो से बढ़ाकर चार कर दी है। अब हर तीसरे दिन पौधों की साइड का निरीक्षण किया जाएगा। इससे पौधों के सूखने की आशंका कम हो जाएगी। 15 अगस्त को पौध लगने के बाद से बारिश न होने के चलते पौधों के बचने की उम्मीद कम हो गई है।
पौधशाला से भी होता है खेल
मुरादाबाद। सरकार स्तर पर लगने वाली पौध को लेकर कोई गंभीर नहीं रहता है। अधिकारी जहां पौध उठाने को मजदूरों को भेज देते हैं, वहीं मजदूर पौध की जड़ों वाली मिट्टी की चिंता किए बिना उनको उठाकर फेंकते रहते हैं। नर्सरी में पौध की खुदाई करने वाले मजदूर भी लापरवाही में कई पौध की जड़ों को काट देते हैं। इससे लगने वाली ज्यादातर पौध सूख जाती हैं। इसका दूसरा लाभ पौध शाला के मालिकों को यह होता है कि अगले साल के लिए फिर से कई लाख पौध का आर्डर मिलने की उम्मीद बन जाती है।