किसान अबकी बार आरपार की लड़ाई को तैयार हो रहे हैं। शासन के गन्ना मूल्य में 20 रुपये क्विंटल की बढ़ोतरी की है। जबकि शाहजहांपुर गन्ना शोधसंस्थान ने गन्ने की पैदावार की लागत 290 रुपसे क्विंटल बताई है।
भारतीय किसान यूनियन असली के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने गन्ना मूल्य में 20 रुपये की बढ़ोतरी कर किसानों का मखौल बनाया है। गन्ना शोध संस्थान के रिकार्ड के अनुसार गन्ने की फसल की पैदावार की लागत 2018 में 290 रुपसे क्विंटल आई थी। इसके आधार पर केंद्र की नीति को माना जाए तो गन्ना मूल्य 430 रुपये होना चाहिए। 20 रुपये की बढ़ोतरी केबाद गन्ने का मूल्य 275 रुपये क्विंटल बैठता है। यह चिंता का विषय है। इस गन्ना मूल्य को किसान स्वीकार नहीं करेंगे।
किसानों के सरकार के खिलाफ लगातार आंदोलन चलते रहे हैं। पिछले दिनों गांव से दूध और सब्जी की दस दिन की सप्लाई रोककर विरोध जताया गया था। अधिकारियों के आफिसों पर टमाटर भेंट किए गए थे। उसके बावजूद अधिकारियों ने सुध नहीं ली। भारतीय किसान यूनियन असली की राष्ट्रीय संघर्ष समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि अबकी बार आरपार का मुकाबला हो जाने दो। इसके लिए आंदोलन में देश के सभी 43 किसान संगठन शामिल हो गए हैं। निर्णय के अनुसार 23 जुलाई को जिला मुख्यालयों से आंदोलन की शुरूआत की जाएगी। डीएम और कमिश्नर आफिसों पर गन्ने और मक्का की होली जलाई जाएगी।