एसबीआई बैंक के एटीएम से कैश निकालने के लिये लाइन पर खडे लोग।
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शनिवार और रविवार .. इन दो दिनों की छुट्टियों के बाद जब बैंक खुले तो पब्लिक को उम्मीद थी कि उन्हें कुछ कैश मिलेगा। लेकिन बैंकों ने सोमवार और मंगलवार को मात्र 125 करोड़ ही बांटा। पूरा शहर इतनी ही रकम में निपटा दिया, जबकि इससे पहले बैंक करीब 166 करोड़ औसतन रोज बांट रहे थे।
नतीजतन बैंक के सामने लाइनें कम नहीं हुई। पचास दिन की समयसीमा नजदीक आने केबाद भी लोगों को कैश किल्लत से जूझना पड़ रहा है। बैंकों में शुक्रवार के बाद पैसा नहीं बचा था। इस दिन बैंकों ने खुलकर पैसे बांटे। 15 दिनों से कैश की राह देख रहे बैंकों को गुरुवार की रात को पैसा मिला था।
इसके बाद शुक्रवार को लोगों को भरपूर कैश दिया। लेकिन इसके बाद बैंक खाली हो गए। शनिवार और रविवार को बैंक बंद रहे। इस दौरान बैंक आरबीआई से कैश की व्यवस्था नहीं कर पाए। बैंक बंद होने से कैश जमा भी नहीं हुए। ऐसे में बैंकों ने दूसरे जिलों के रीजनल ब्रांचों से कैश का इंतजाम कर कैश बांटा।
इतने कम कैश से पूरे महानगर को फुसलाने में बैंक कामयाब नहीं हुए। यही कारण है कि सोमवार और मंगलवार को कई बैंकों की अधिकांश शाखाओं में लोगों ने हंगामा किया। नेशनल और प्राइवेट बैंकों को मिलाकर दो दिनों में बैंकों ने मात्र सवा सौ करोड़ ही बांटे।
सोमवार चालीस बैंकों में से दस बैंक ऐसे थे जो बिल्कुल ही कैशलेस हो गए थे। इन बैंकों में कैश बांटे ही नहीं गए। जब सोमवार को इन बैंकों में लोगों ने कैश जमा किया तब मंगलवार को इन बैंकोें ने हजार, दो हजार रुपये प्रति खाताधारक बांटकर अपनी साख बचाई।