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चश्मदीदों की गवाही और मृत्यु से पहले दिए बयान ने दिलाई सजा

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मुरादाबाद।
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हिंदू युवा वाहिनी के जिला अध्यक्ष श्याम सिंह सैनी ने मृत्यु से पहले मजिस्ट्रेट को बयान दिए थे। जिसमें उन्होंने बताया कि उसे यशपाल सैनी और उसके सुभाष सैनी ने गोली मारी हैं। इस केस में श्याम सिंह के मृत्यु पूर्व बयान अहम रहे। इसके अलावा घटना के समय ध्यान सिंह के साथ उसका दोस्त बबलू भी मौजूद था। जिसने पूरी घटना को अपनी आंखों से देखा। तमाम धमकियां और केस दर्ज होने के बाद भी चश्मदीद अपने बयानों से नहीं मुकरा। उसने दोस्ते हत्यारों को सजा दिलाकर दोस्ती का फर्ज अदा किया। जबकि श्याम सिंह के भाई करन सिंह भी अपने बयानों से नहीं हटे। उन्होंने बताया कि यशपाल और सुभाष सैनी ने ही ध्यान सिंह को गोली मारनी थी। गोली मारने के बाद दोनो भाई मौके से भाग गए थे। इस केस में बारह लोगों की गवाही हुई। चश्मदीदों की गवाही और श्याम सिंह के बयानों को अदालत ने आधार मानते हुए सजा सुनाई।

भिखारियों को पैसे देते मारी थी गोलियां
मुरादाबाद। ध्यान सिंह के भाई करन सिंह ने बताया कि उसके भाई रोज सुबह जिम जाते थे। डबल फाटक पुल के पास संजय नगर में वह रास्ते में भिखारियाें को पैसे देने के बाद ही आगे बढ़ते थे। घटना वाले दिन ध्यान सिंह और उसका दोस्त बबलू स्कूटी से जिम जा रहे थे। चश्मदीद व श्याम सिंह के दोस्त ने बताया कि भिखारियों को देखकर ध्यान सिंह ने स्कूटी रोक ली और वह पैसे देने लगे। इसी दौरान वहां सुभाष सैनी और यशपाल सैनी पहुंच गए। दोनों भाइयों ने ध्यान सिंह पर गोलियां बरसा दीं। जिसमें दो गोली ध्यान सिंह को लगीं। बबलू उर्फ दिलीप को गोली मारने की धमकी देकर शांत कर दिया। इसके बाद दोनों भाई वहां से फरार हो गए थे।
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पूर्व पार्षदों के भाई की हत्या में जेल गया था ध्यान सिंह
मुरादाबाद। दोनों परिवारों की रंजिश पुरानी है। पूर्व पार्षद यशपाल सिंह और सुभाष सैनी के बड़े भाई राजेश सैनी भी पार्षद थे। उनकी भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में ध्यान सिंह का नाम सामने आया था। तब पुलिस ने खुलासा करते हुए बताया था कि ध्यान सिंह सैनी ने इस हत्याकांड की साजिश रची थी, लेकिन दो माह बाद ही ध्यान सिंह को जमानत मिल गई थी। इसके अलावा यशपाल के चचेरे भाई संजय सैनी की हत्या कर दी गई थी। जिसमें सुभाष सैनी और यशपाल सैनी का नाम सामने आया था। बताया गया कि दोनों परिवारों से एक एक मर्डर होने के बाद दोनों केसों में समझौता हो गया।


पुल से नीचे चल रहे अवैध धंधों को लेकर शुरू हुई थी रंजिश
मुरादाबाद। डबल फाटक पुल के नीचे वर्षों से गैर कानूनी धंधे चलते आ रहे हैं। इन धंधों को लेकर ही ध्यान सैनी और यशपाल सैनी के बीच रंजिश बढ़ती जा रही थी। कई बार दोनों पक्षों में मारपीट और फायरिंग हुई थी। एक बार शुरू हुई रंजिश अब तक नहीं खत्म नहीं हुई। जिसमें कई हत्याएं हो चुकी हैं।

फैसला सुनने के लिए कचहरी में लगी रही भीड़
मुरादाबाद। शहर के बहुचर्चित हत्याकांड का फैसला जाने के लिए कचहरी में जिला जज कोर्ट के बाहर भीड़ जुटी रही। वकीलों के अलावा शहर से भी तमाम लोग कचहरी में पहुंचे। जिस कारण कचहरी में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ानी पड़ी। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों भाइयों को कड़ी सुरक्षा में सेशन हालत तक पहुंचा गया। यहां से दोनों भाइयों को वाहन से जेल भेज दिया गया।


कुर्की के बाद पकड़े गए थे पूर्व पार्षद
मुरादाबाद। दस अप्रैल 2014 को ध्यान सिंह को गोली मारी गई थी। 18 अप्रैल 2014 को नोएडा फोर्टिस अस्पताल में हिन्दू युवा वाहिनी के जिला अध्यक्ष ध्यान सिंह की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से ही दोनों भाई फरार थे। पुलिस ने इनकी संपत्ति की कुर्की की थी। कुर्की से पहले ही दोनों भाइयों ने अपने अपने घर खाली कर दिए थे। दिसंबर 2014 में सुभाष सैनी पकड़ा गया था। जबकि यशपाल सैनी जनवरी 2016 में काशीपुर में पकड़ा गया था।
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वादी पर दबाव डालने को दर्ज करा दिए हत्या के केस
मुरादाबाद। ध्यान सिंह हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए यशपाल सैनी और सुभाष सैनी ने इस केस से बचने के लिए हर तौर तरीका अजमाया। केस के वादी व ध्यान सिंह के भाई व भाजपा नेता मोहन लाल सैनी पर दबाव डालने के लिए उन पर कई केस दर्ज कराए। पाकड़ा में कांवड़िए की हत्या में मोहन लाल सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया। मनोज बंगाली हत्याकांड में भी मोहन लाल के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई। इसके अलावा बिजनौर के नहटौर में मोहन लाल, ध्यान सिंह के बेटे और ध्यान सिंह के दोस्त बबलू के खिलाफ जान लेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच में इन सभी केसों में एफआर लगा दी है।
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