दस दिन पहले गजरौला में शाह और योगी ने राम मंदिर को अपने भाषण के केंद्र में रखा तो सोमवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने एक घंटे से ज्यादा के भाषण में राम का नाम तक नहीं लिया। मंडल में 40 किमी के फासले में हुई भाजपा के दिग्गजों की दो सभाओं का यह फर्क कार्यकर्ताओं की जुबान पर भी है। राजनाथ ने कार्यकर्ताओं को भी नसीहत दी कि वोट मिले या न मिले लेकिन जनता से झूठे वादे न करें। वादे वही किए जाएं जिन्हें पूरा किया जा सके। उन्होंने पोखरण के परमाणु विस्फोट से लेकर कारगिल युद्ध तक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जमकर तारीफ की लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र एक बार भी नहीं किया।
दो फरवरी को गजरौला में भाजपा का पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बूथ सम्मेलन था। इसमें पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से एलान किया था कि रामलला का भव्य मंदिर अयोध्या में उसी स्थान पर बनेगा जहां उनका जन्म हुआ। लेकिन दो फरवरी के शाह - योगी के हिंदुत्व और मंदिर एजेंडे से हटकर सोमवार को राजनाथ के भाषण में राम को जगह नहीं मिल सकी। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के किसी प्रधानमंत्री ने यदि भारत का मर्म समझा तो वह सिर्फ अटल बिहारी वाजपेयी थे। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय विरोध के बावजूद पोखरण में परमाणु विस्फोट कर देश को परमाणु शक्ति बनाया और कारगिल युद्ध को सेना और कूटनीति दोनों मोर्चों पर जीता। गृह मंत्री ने पहली बार देश को यह कूटनीतिक जीत मिली थी कि कोई भी देश कारगिल युद्ध में भारत का विरोध नहीं कर सका। उन्हाेंने कहा कि आज देश में जो चौतरफा चौड़ी - चौड़ी सड़कों का जाल नजर आ रहा है यह भी वाजपेयी की देन है। मोदी सरकार में हुई सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र गृह मंत्री ने नहीं किया। अलबत्ता मोदी की तारीफ में इतना जरूर बोले कि मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय जगत में देश को नई पहचान दी है। अमूमन जय श्री राम के नारे से भाजपा नेता भाषणों की शुरुआत करते रहे हैं लेकिन सोमवार को भाषण शुरू करने से लेकर अंत करने तक राजनाथ ने राम का नाम एक बार भी नहीं लिया। राहुल गांधी पर बिना नाम लिए कई बार निशाना साधा लेकिन एक बार भी हिंदू - मुस्लिम शब्द का जिक्र नहीं किया। देश में कांग्रेस के नेतृत्व में हो रहे गैर भाजपाई दलों के गठबंधन की आलोचनाओं के बीच राजनाथ ने सोमवार को अपने भाषण में तीन बार कहा कि वाजपेयी जी ने 24 दलों की सरकार चलाई थी। बोले, पूर्ण बहुमत आने के बाद भी हमने सहयोगी दलों को सरकार में शामिल किया।